
सीहोर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक देने के उद्देश्य से शुरू की गई महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना मध्यप्रदेश और सीहोर जिले में प्रशासनिक गतिरोध का शिकार होती दिख रही है। योजना के शुभारंभ के 14 दिन बीत जाने के बाद भी जिले में अब तक एक भी मुफ्त पंजीयन नहीं हो सका है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस जनकल्याणकारी योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में बने मकानों और भूखंडों का नि:शुल्क पंजीयन कर ग्रामीणों को संपत्ति कार्ड और मालिकाना हक दिया जाना है। योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के आधार पर बैंक से आसानी से लोन दिलाना और ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले जमीनी विवादों को समाप्त करना है। राज्य सरकार ने इस योजना के तहत पूरे प्रदेश में एक महीने के भीतर 55 लाख निजी संपत्तियों का मुफ्त पंजीयन करने का लक्ष्य रखा है, जिसका पूरा खर्च सरकार वहन कर रही है।
पटवारियों के बहिष्कार से अटका ड्रीम प्रोजेक्ट
प्रधानमंत्री मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए सीहोर जिले के 426 पटवारियों को 20 हजार रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य सौंपा गया है। हालांकि पटवारी संघ ने योजना के क्रियान्वयन का बहिष्कार कर दिया है। पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष संजय राठौर ने बताया कि पंजीयन विलेख ‘रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट’ में पटवारी को ‘निष्पादक’ बनाया जा रहा है, जिसका संघ कड़ा विरोध कर रहा है। पटवारियों को आशंका है कि भविष्य में यदि संबंधित जमीन की सीमा, क्षेत्रफल या वारिसान ‘उत्तराधिकार’ को लेकर कोई कानूनी या पारिवारिक विवाद खड़ा होता है तो निष्पादक होने के नाते उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। संघ का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, बहिष्कार जारी रहेगा।
फिलहाल ई-केवाईसी की प्रक्रिया जारी
मामले पर सीहोर तहसीलदार विराट अवस्थी का कहना है कि प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना पूरी तरह से किसानों और ग्रामीणों के हित में है। उन्होंने बताया कि भले ही पंजीयन का काम प्रभावित हुआ हो, लेकिन वर्तमान में योजना के तहत ई-केवाईसी का कार्य निरंतर चल रहा है।