
सीहोर। जिले के पटवारी इन दिनों अत्यधिक कार्यभार और लंबित आर्थिक मांगों को लेकर आक्रोशित हैं। शुक्रवार को मध्य प्रदेश पटवारी संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में पटवारियों ने टाउनहॉल से कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला और अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा।
पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष संजय राठौर ने ज्ञापन का वाचन करते हुए कहा कि पटवारी पूरी निष्ठा से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहे हैं, लेकिन उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। पटवारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया था, शासन से मानदेय स्वीकृत होने के बावजूद भुगतान नहीं मिला। कृषि संगणना और छठी लघु सिंचाई संगणना का मानदेय अब तक नहीं मिला है, जबकि सातवीं गणना का काम शुरू करवा दिया गया है।
नवोदित पटवारियों को नहीं मिल रही पूरी सैलरी
ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त पटवारियों को 100 प्रतिशत वेतन देने की घोषणा की थी। हाईकोर्ट जबलपुर ने भी कर्मचारियों के हित में आदेश जारी किए हैं, लेकिन शासन स्तर पर यह आदेश आज भी लंबित है। पटवारियों ने मांग की है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से पूर्ण वेतन दिया जाए और अनूपपुर जैसे जिलों में पटवारियों का वेतन रोकने जैसी दमनकारी कार्रवाई पर रोक लगे।
काम के बोझ से मानसिक दबाव में पटवारी
पटवारियों ने अधिकारियों द्वारा बनाए जा रहे अनावश्यक दबाव पर भी आपत्ति जताई। मकानों पर नंबर डालने का काम स्थानीय निकायों का हैए लेकिन यह जबरन पटवारियों पर थोपा जा रहा है। वर्तमान में जियोटैग गिरदावरी समय सीमा 28 फरवरी, फसल पंजीयन, वन संपरिवर्तन और सिंचाई संगणना जैसे कई काम एक साथ चल रहे हैं। पटवारियों का कहना है कि हर काम के लिए अधिकारी समय सीमा से पहले कार्य पूर्ण करने का अनैतिक दबाव बनाते हैं, जिससे फील्ड स्तर पर काम करना मुश्किल हो गया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पटवारी संघ के सदस्य और जिले भर के पटवारी शामिल रहे।