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पलायन की खबरों के बाद जागा पीएचई विभाग

डेंजर जोन के 258 गांवों के लिए बनाया एक्शन प्लान

सीहोर। जिले के ग्रामीण अंचलों विशेषकर खामलिया जैसे क्षेत्रों से पानी की कमी के कारण ग्रामीणों के पलायन की खबरों ने प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। विभाग ने भीषण गर्मी से निपटने के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत जिले की उन 258 बसाहटों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिन्हें पेयजल संकट संभावित (डेंजर जोन) माना गया है। पलायन रोकने और ग्रामीणों को गांव में ही पानी उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने तकनीकी घेराबंदी शुरू कर दी है।
राइजर पाइप का सहारा
58 गांवों के 102 हैंडपंपों में 612 मीटर अतिरिक्त पाइप बढ़ाए गए हैं, ताकि पाताल की ओर जाते जलस्तर को पकड़ा जा सके।
हाइड्रो फ्रैक्चिरिंग तकनीक
95 चिन्हित बसाहटों में जल आवक क्षमता बढ़ाने के लिए हाइड्रो फ्रैक्चिरिंग की गई है, जिससे बंद पड़े नलकूपों में फिर से पानी आने लगा है।
नए स्रोत और सफाई
30 स्थानों पर नए हैंडपंप खोदे गए हैं और 75 बसाहटों में सिंगल फेस मोटर पंप लगाकर सप्लाई को सुचारू किया गया है। पुराने और कचरे से भरे नलकूपों की सफाई भी युद्ध स्तर पर जारी है।
8830 हैंडपंपों और 499 योजनाओं का जाल
वर्तमान में विभाग का दावा है कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 8830 हैंडपंपों, 299 एकल नलजल योजनाओं और 200 समूह नलजल योजनाओं के माध्यम से प्यास बुझाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जहां भी तकनीकी खराबी की सूचना मिल रही है, वहां तत्काल सुधार कार्य कराया जा रहा है।
कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी
पलायन की स्थिति दोबारा न बने इसके लिए जिला और उपखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। ग्रामीण किसी भी समय पानी की किल्लत की शिकायत यहां दर्ज करा सकते हैं। साथ ही कलेक्टर बालागुरू के. के निर्देश पर पेयजल परिरक्षण अधिनियम को सख्ती से लागू किया गया है, ताकि उपलब्ध पानी का दुरुपयोग न हो।

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