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सीहोर में हर महीने 80 जगह फूट रही पाइप लाइनें, इंदौर की ‘जल त्रासदी’ से सबक की जरूरत

सीहोर। इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से हुई 15 मौतों ने सबको डरा दिया है। सीहोर शहर में भी हालात कुछ ठीक नहीं हैं। यहां बिछी पाइप लाइनें 50 साल पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं, जो अब शहर के लिए किसी खतरे से कम नहीं हैं। नगर पालिका के आंकड़े बताते हैं कि शहर में हर महीने औसतन 80 जगहों पर पाइपलाइन फूट रही है। ये लीकेज न केवल पानी बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि गंदे नाले-नालियों का पानी नलों तक पहुंचाने का रास्ता भी बन रहे हैं।
बता दें शहर की आबादी एक लाख से ज्यादा हो चुकी है, लेकिन पानी सप्लाई का सिस्टम दशकों पुराना है। मुख्य बाजार, गंज और पुराने मोहल्लों में जो पाइप लाइनें डली हैं, वे अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। आलम यह है कि जैसे ही सप्लाई का प्रेशर बढ़ता है, पाइप जवाब दे जाते हैं। तकनीकी अमले के अनुसार ये पाइप लाइनें जमीन के नीचे सड़ चुकी हैं। कई इलाकों में पेयजल और सीवर लाइनें बिल्कुल पास-पास हैं। पाइप लीकेज होने पर गंदा पानी उनमें आसानी से समा जाता है। इंदौर में भी इसी लापरवाही के कारण जानलेवा संक्रमण फैला था।
अमृत योजना में देरी, पैचवर्क के भरोसे सिस्टम
पुरानी पाइप लाइनों को बदलने के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत नई पाइपलाइन बिछाई जानी है। यह काम 2 साल में पूरा होना था, लेकिन ठेकेदार अब एक साल का अतिरिक्त समय मांग रहा है। तब तक नगर पालिका सिर्फ अस्थाई सुधार के भरोसे है, जो समस्या का परमानेंट समाधान नहीं है।
फैक्ट फाइल
वार्डों की संख्या: 35
कुल पाइपलाइन: 100 किलोमीटर लंबी
मासिक लीकेज: लगभग 80 जगह
पानी की बर्बादी: हर महीने करीब 30 हजार लीटर लीकेज से
सुधार टीम: 6-6 सदस्यों की केवल 3 टीमें

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