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आदिपुरुष में जनभावनाएं हुई आहत, प्रदर्शन पर लगे रोक : रमेश सक्सेना

सीहोर। भगवान श्रीराम मर्यादा पुरूषोत्तम हैं, हरेक भारतीय की भावनाएं उनसे जुडी हुई हैं। हिन्दुओं के वह आराध्य और पूजनीय हैं। आदिपुरूष फिल्म में भगवान श्रीराम, हनुमान, माता सीता को अलग तरह से दर्शाया गया है जिससे जनभावनाएं आहत हुई हैं। फिल्म के संवाद बडे ही घटिया और दोयम दर्जे के हैं। लोगों का विश्वास और आस्था भगवान श्रीराम, हनुमान और माता सीता से जुडी हंै, उन्हें हम बडे पवित्र रूप से देखते हैं मानते हैं और पूजते हैं। फिल्म में जिस प्रकार से देवताओं को संवाद करते हुए और उनका चित्रण किया गया है यह बडा ही शर्मनाक है। यह बात पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता रमेश सक्सेना ने कही। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि सेंसर बोर्ड से यह फिल्म पास कैसे हो गई, केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, इसके पीछे किसी न किसी की साजिश लग रही है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होना चाहिए। वैसे तो भाजपा राम के नाम राजनीति करती है वोट बटोरती है, लेकिन आज जब भगवान राम और रामायण का गलत चित्रण हुआ है तो भाजपा के शीर्ष नेता चुप बैठे हैं। उन्होंने मांग की है कि आदिपुरुष फिल्म के प्रदर्शन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए और फिल्म मेकर पर कडी कार्रवाई की जानी चाहिए। कहा कि हनुमान महाबलशाली हैं  उनका हरेक रूप सुंदर है और मनमोहक है। लेकिन आदिपुरुष फिल्म में हनुमान की छवि भिन्न दिखाई गई है, जिससे लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाए।

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