
भैरूंदा। बुधनी विधानसभा क्षेत्र में विकास के कार्य तो जमकर चल रहे हैं, लेकिन इनमें भ्रष्टाचार भी चरम-सीमा से उपर पहुंच गया है। यही कारण है कि बेहतर क्वालिटी के निर्माण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। अब ताजा उदाहरण भैरूंदा विकासखंड के गांव धौलपुर नदी से बालागांव तक बनने जा रहे करीब तीन किलोमीटर की सड़क एवं नदी पर पुल का सामने आया है। इसमें सड़क ठेकेदार द्वारा अभी तो बेस ही तैयार किया जा रहा है, लेकिन इसमें ही जमकर भ्रष्टाचार शुरू हो गया है। अब घटिया निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति उठाई है एवं सड़क का निर्माण कार्य बंद करा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बेस में ही लीपापोती शुरू हो गई है तो फिर ये सड़क कैसे मजबूत बनेगी।
बारिश में खुल गई सड़कों की पोल –
इससे पहले भैरूंदा तहसील में बनी कई सड़कों की पोल बारिश ने खोल दी है। सड़कों सहित चल रहे अन्य निर्माण कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इसके कारण ये सड़कें एक साल में ही उखड़ रही है। भैरूंदा से गोपालपुर तक मुख्य सड़क पर भी लाखों रूपए की लागत से पेंच वर्क कराया गया था, लेकिन पेंचवर्क भी इतना घटिया तरीके से किया गया कि बारिश में पूरी सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इसी तरह प्रधानमंत्री सड़क योजना की सड़कों की भी हालत खराब है। सड़कों में गड्ढे ही गड्ढे हो रहे हैं। इसके कारण लोगों को परेशानियां भी आ रही हैं।
डंपरों का हो रहा संचालन, रोड बन रही हल्की –
भैरूंदा विकासखंड में बन रही ज्यादातर सड़कों पर रेत, मिट्टी, गिट्टी, कोपरा से भरे ओव्हर लोडिंग ट्रकों की जमकर आवाजाही होती है। इन ओव्हर लोडिंग डंपरों के कारण सड़कों की हालत खराब हो रही है। ठेकेदारों द्वारा जो सड़कें बनाई जा रही हैं वह बेहद हल्की एवं घटिया क्वालिटी की बनाई जा रही है, जो ओव्हर लोडिंग वाहनों के कारण पूरी तरह से खराब हो रही है। ज्यादातर सड़कों पर ये डंपरा दिनभर दौड़ लगाते हैं, लेकिन सड़कें इतनी मजबूत नहीं बनने के कारण ये जल्दी से खराब हो रही है। ये मिलीभगत का खेल यहां के जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों के बीच में ऐसा चल रहा है, जिसमें न तो आमजन की परवाह है और न ही सरकार के खजाने की चिंता है। हर तरह सिर्फ भ्रष्टाचार करके पैसा कमाया जा रहा है।
ये बोले जिम्मेदार –
इस मामले में ब्रिज कारपोरेशन के एसडीओ सोमेश श्रीवास्तव का कहना है कि सड़क का निर्माण तय मापदंडों के अनुसार ही हो रहा है। सड़क को लेकर किसानों के दो पक्षों में आपसी तालमेल नहीं है। दरअसल कुछ किसान चाहते हैं कि सड़क उंची बने और कुछ किसान चाहते हैं सड़क की उंचाई ज्यादा न हो। सड़क की उंचाई ज्यादा होने से किसानों की जमीन सड़क में चली जाएगी, इसके कारण वे इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ किसान चाहते हैं कि सड़क उंची बने। इसके कारण वे विरोध कर रहे हैं। सड़क का निर्माण बेहतर क्वालिटी एवं तय मापदंडों के अनुसार ही कराया जाएगा।