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साहिल हत्याकांड: कत्ल के बाद लाश जलाकर सबूत मिटाने वाले तीनों आरोपियों को उम्रकैद

सीहोर। करीब दो साल पहले साहिल हत्याकांड मामले में न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है। विशेष न्यायालय ने त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग में साहिल की बेरहमी से हत्या करने और पहचान मिटाने के लिए शव को जलाने वाले तीनों आरोपियों को उम्रकेद की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर की अदालत ने साजिद, जुबैर और आमिर को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार मामला 31 दिसंबर 2023 की रात का है। आरोपी साजिद, साहिल की महिला मित्र से एकतरफा प्रेम करता था। जब साजिद ने साहिल को उसके साथ बात करते देखा तो वह खून खराबे पर उतारू हो गया। उसने अपने दोस्त जुबैर के साथ मिलकर कब्रिस्तान के पास साहिल को घेरा और चाकू से उसके सीने व फेफड़ों पर ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत की नींद सुला दिया।
लाश को स्कूटी पर ले जाकर जलाया
हत्या को अंजाम देने के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए आरोपियों ने साजिश रची। उन्होंने अपने तीसरे साथी आमिर को बुलाया और साहिल की लाश को आमिर की स्कूटी पर रखकर नाले के पास ले गए। वहां आरोपियों ने शव को आग लगा दी, ताकि उसकी पहचान न हो सके। हत्या में प्रयुक्त चाकू और मृतक की बाइक को एक बावड़ी में फेंक दिया गया था।
राख से मिली सजा
इस अंधे कत्ल को सुलझाने में पुलिस और फोरेंसिक साइंस की बड़ी भूमिका रही। शव इतना जल चुका था कि शिनाख्त मुश्किल थी, लेकिन माता-पिता के डीएनए मिलान से साबित हुआ कि लाश साहिल की ही है। हत्यारों ने लाश जिस स्कूटी पर ढोई थी, उसके फोम पर मिले खून के कतरे ने कत्ल की पूरी कहानी बयान कर दी। मोबाइल टॉवर लोकेशन और कॉल रिकॉड्र्स ने आरोपियों की मौजूदगी घटनास्थल पर पुख्ता कर दी।
न्यायालय का सख्त संदेश
अभियोजन की ओर से 15 गवाहों के बयानों और पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इसे गंभीर अपराध माना। शासकीय अधिवक्ता अनिल बादल और आशीष त्यागी की पैरवी के बाद न्यायालय ने तीनों को धारा 302 में उम्रकैद और धारा 201 में 7.7 साल की अतिरिक्त सजा सुनाई।

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