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रेहटी कॉलेज में विज्ञान और जल संरक्षण की गूंज, विकसित भारत के लिए बेटियों ने दिखाए नवाचार

सीहोर। शासकीय महाविद्यालय रेहटी में इन दिनों शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों की धूम है। महाविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में विशेष व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम विज्ञान में महिलाएं विकसित भारत के लिए उत्प्रेरक पर केंद्रित रही, जिसमें विज्ञान के क्षेत्र में नारी शक्ति के योगदान और भविष्य के नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नर्मदापुरम से पधारीं डॉ. सुमन यदुवंशी सहायक प्राध्यापक भौतिक विज्ञान ने डॉ. सीवी रमन के जीवन और रमन प्रभाव की खोज पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे 1930 में नोबेल पुरस्कार और 1954 में भारत रत्न से सम्मानित डॉ. रमन ने भारतीय विज्ञान को विश्व पटल पर स्थापित किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे राजाराम रावते ने बताया कि भारत सरकार द्वारा 1987 से प्रतिवर्ष यह दिवस रमन प्रभाव की खोज की याद में मनाया जाता है।
नवाचारों के लिए छात्राओं को किया प्रेरित
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजली गढ़वाल ने विद्यार्थियों को जीवन के हर क्षेत्र में विज्ञान के नवीनतम ज्ञान को अपनाने और नवाचारों के लिए प्रेरित किया। वनस्पति विज्ञान की सहायक प्राध्यापक सौम्या राजपूत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों और रिसर्च के क्षेत्र में तकनीक के उपयोग की जानकारी दी। इस दौरान डॉ. निधि मालवीय, डॉ. लेखिका श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों की महिला प्राध्यापकों ने स्टार्टअप और भारतीय ज्ञान परंपरा के नए आयामों पर अपने विचार साझा किए।

पोस्टर और मॉडल प्रतियोगिता में दिखा उत्साह
विज्ञान पर्व के दौरान आयोजित प्रतियोगिता में बीएससी के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिद्धार्थ मंडलोई, महक चौहान, दिया केवट, शालिनी चौहान, वेदिका गौर, चंदा, निधि, मुस्कान प्रजापति, सृष्टि और विशाल प्रिया नागर ने विज्ञान के नवाचारों पर आधारित आकर्षक पोस्टर और मॉडल प्रदर्शित किए। सफल प्रतिभागियों को प्राचार्य द्वारा शील्ड और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
भविष्य के लिए बचाएं पानी
इसी कड़ी में मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार महाविद्यालय में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। क्रीड़ा अधिकारी मनोज वर्मा के संरक्षण और डॉ. निधि मालवीय व डॉ. एकता यादव के निर्देशन में हुए इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जल संकट की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की।
छात्रों ने अपने संबोधन में कहा कि यदि आज हम जल संवर्धन के प्रति जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी के लिए जीवन असंभव हो जाएगा। उन्होंने जल के महत्व और उसके संरक्षण के उपायों पर अपने प्रभावी विचार रखे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. सुरेश कुमार सोलंकी, डॉ. ज्योति विश्वकर्मा और डॉ. दीपक रजने सहित समस्त स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। तकनीकी सहयोग में अभिषेक बांकरिया, मनीष मोनिया और मेघदूत शर्मा सहित अन्य लैब टेक्नीशियन सक्रिय रहे।

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