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सीहोर : नेशनल लोक अदालत का आयोजन 13 मई को, जिले में 19 खण्डपीठों में रखे जाएंगे 4348 प्रकरण

सीहोर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार 13 मई 2023 को वर्ष की द्वितीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन प्रदेशभर में किया जाएगा। जिला सीहोर एवं तहसील न्यायालय आष्टा, नसरूल्लागंज, बुदनी एवं इछावर में वर्ष की द्वितीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष अमिताभ मिश्र के निर्देशानुसार किया जाएगा। नेशनल लोक अदालत में न्यायालय में लंबित आपराधिक शमनीय प्रकरण, धारा 138 पराक्राम्य लिखित अधिनियम, क्लेम प्रकरण, विद्युत अधिनियम, वैवाहिक विवाद सम्बंधी व अन्य सिविल प्रकरण सहित कुल 4348 राजीनामा योग्य प्रकरण रखे जाएंगे। विधुत अधिनियम, बैंक रिकवरी, जलकर एवं बीएसएनएल. विभाग से संबंधित लगभग 8780 प्रीलिटिगेशन प्रकरण नेशनल लोक अदालत के समक्ष रखे जाएंगे। नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण के लिए जिले में 19 खण्डपीठों का गठन किया गया है, जिसमें सीहोर में 6, आष्टा में 7, नसरूल्लागंज में 2, बुदनी में 3 एवं इछावर में 1 खण्डपीठ का गठन किया गया है। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुकेश कुमार दांगी द्वारा बताया गया कि उर्जा विभाग द्वारा विद्युत अधिनियम से संबंधित न्यायालय में लंबित व प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में 13 मई को आयोजित लोक अदालत के संबंध में छूट के निर्देश जारी किए गए हैं। जिसके अनुसार न्यायालय में लंबित विद्युत अधिनियम के योग्य प्रकरणों में सिविल दायित्व में 20 प्रतिशत एवं नियमानुसार संपूर्ण ब्याज की छूट एवं प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में भी सिविल दायित्व में 30 प्रतिशत एवं नियमानुसार संपूर्ण ब्याज की छूट रहेगी, उक्त छूट मात्र नेशनल लोक अदालत में समझौता करने पर सिविल दायित्व, चोरी की मूल राशि 50 हजार रुपए तक के प्रकरणों में ही लागू रहेगी। नगर पालिका से संबंधित जलकर, सम्पत्ति कर के प्रकरणों में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी निर्देशानुसार छूट प्रदान की जाएगी, साथ ही बैंक रिकवरी के प्रकरणों में भी बैंकों द्वारा नियमानुसार छूट प्रदान की जावेगी।
लोक अदालत के लाभ –
पक्षकारों के मध्य आपसी सद्भाव बढ़ता है, कटुता समाप्त होती है, समय, धन व श्रम की बचत होती है। कोई भी पक्षकार हारता नहीं है। दोनों पक्षकारों की जीत होती है। लोक अदालत में न्याय शुल्क वापस हो जाता है। लोक अदालत का आदेश/निर्णय अंतिम होता है, लोक अदालत के आदेश के विरूद्ध अपील नही होती। लोक अदालत में पक्षकारों के मध्य विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। प्रधान जिला न्यायाधीश अमिताभ मिश्र ने आम नागरिकों से अपील की है की 13 मई को द्वितीय लोक अदालत में अपने प्रकरणों का निराकरण समझौता, सहमति के आधार पर कराया जाकर लोक अदालत का लाभ उठाने उठाएं और अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीहोर एवं तहसील विधिक सेवा समिति आष्टा, नसरूल्लागंज, बुदनी एवं इछावर से सम्पर्क किया जा सकता है।
बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरण में 13 मई को लोक अदालत में रखे जाएंगे –
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्य क्षेत्र के 16 जिलों में 13 मई को नेशनल लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरण को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। कंपनी द्वारा विद्युत अधिनियम-2003 धारा 126 एवं 135 के अंतर्गत न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की गई है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें। अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिए निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किए जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किए जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी। आवेदक को निर्धारित छूट के उपरांत शेष बिल आंकलित सिविल दायित्व एवं ब्याज की राशि का एकमुश्त भुगतान करना होगा। उपभोक्ता को विचाराधीन प्रकरण वाले परिसर एवं अन्य परिसरों पर उसके नाम पर किसी अन्य संयोजन/संयोजनों के विरुद्ध विद्युत देयकों की बकाया राशि का पूर्ण भुगतान भी करना होगा। आवेदक के नाम पर कोई वैध कनेक्शन न होने की स्थिति में छूट का लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदक द्वारा वैध कनेक्शन प्राप्त करना एवं पूर्व में विच्छेदित कनेक्शनों के विरूद्ध बकाया राशि (यदि कोई हो) का पूर्ण भुगतान किया जाना अनिवार्य होगा।नेशनल लोक अदालत में छूट आवेदक द्वारा विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग पहली बार किए जाने की स्थिति में ही दी जाएगी। विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग के प्रकरणों में पूर्व की लोक अदालत/अदालतों में छूट प्राप्त किए उपभोक्ता/उपयोगकर्ता छूट के पात्र नहीं होंगे। सामान्य बिजली बिलों में जुड़ी बकाया राशि पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। नेशनल लोक अदालत में छूट आकलित सिविल दायित्व राशि पचास हजार तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल “लोक अदालत”13 मई 2023 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी।

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