वैशाख मास में जल की सेवा सबसे बड़ा पुण्य, 3 अप्रैल से शुरू होगा आस्था का महीना

सीहोर। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की समाप्ति के बाद अब पवित्र वैशाख मास का प्रारंभ होने जा रहा है। इस वर्ष वैशाख मास 3 अप्रैल शुक्रवार से चित्रा नक्षत्र में शुरू होगा, जो 1 मई तक रहेगा। हिंदू नववर्ष विक्रम संवत् 2083 का यह दूसरा महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। विशाखा नक्षत्र के नाम पर आधारित इस महीने को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष आराधना के लिए समर्पित किया गया है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार वैशाख मास की इस 29 दिनों की अवधि में कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व मनाए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से भगवान परशुराम जन्मोत्सव, गंगा सप्तमी, गुरु गोरखनाथ जयंती, बुद्ध पूर्णिमा जैसे उत्सव शामिल हैं। इन तिथियों पर जप, तप और दान का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है।
जल दान और तीर्थ स्नान का अक्षय पुण्य
पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि वैशाख मास में किया गया धर्म-कर्म कभी निष्फल नहीं होता। इस महीने में पवित्र नदियों और तीर्थों में स्नान करने मात्र से साधक के सभी कायिक और मानसिक दोष समाप्त हो जाते हैं। शास्त्रों की मान्यता है कि वैशाख में गरीबों और जरूरतमंदों को किया गया दान अक्षय जिसका कभी क्षय न हो फल प्रदान करता है। विशेष सावधानी के तौर पर इस महीने में कांसे के बर्तन में भोजन करने की मनाही की गई है।
श्रद्धालु कैसे करें सेवा और पूजा
पंडित शर्मा के अनुसार वैशाख मास के दौरान श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष नियम और सेवा कार्य सुझाए हैं प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और श्री सत्यनारायण कथा का श्रवण करना उत्तम फलदायी है। तुलसी जी को विष्णु प्रिया कहा जाता है, इसलिए प्रतिदिन तुलसी पूजन करें और संध्या के समय वहां घी का दीपक जलाएं। गर्मी के इस मौसम और वैशाख के महत्व को देखते हुए श्रद्धालुओं को प्याऊ लगवाना चाहिए। पशु-पक्षियों और गौमाता के लिए जल का इंतजाम करना महापुण्य का कार्य माना गया है। पुण्य प्राप्ति के लिए मिट्टी का घड़ा, छाता, चप्पल और शीतल जल का दान करना श्रेष्ठ है। पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि जो व्यक्ति वैशाख मास के नियमों का पालन करता है और निष्काम भाव से सेवा कार्य करता है, उसे जीवन में सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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