नर्मदा तट पर सात दिवसीय एनएसएस शिविर संपन्न, विद्यार्थियों को सिखाए मानसिक स्वास्थ्य और जीवन प्रबंधन के गुर

सीहोर। शासकीय महाविद्यालय रेहटी द्वारा सामाजिक सेवा और छात्र कल्याण की दिशा में दो बड़े आयोजन किए गए। एक ओर जहां नर्मदा तट ग्राम आंवलीघाट में राष्ट्रीय सेवा योजना का सात दिवसीय विशेष शिविर संपन्न हुआ, वहीं दूसरी ओर महाविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आत्महत्या रोकथाम पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया।
महाविद्यालय की एनएसएस इकाई द्वारा 16 से 22 फरवरी तक ग्राम आंवलीघाट में विशेष शिविर का आयोजन किया गया। ‘मेरा युवा भारत’ डिजिटल साक्षरता के लिए युवा और नर्मदा स्वच्छता की थीम पर आधारित यह शिविर प्राचार्य डॉ. अंजलि गढ़वाल के संरक्षण एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार मालवीय के निर्देशन में संपन्न हुआ।
शिविर के दौरान स्वयंसेवकों ने स्वच्छता, पॉलीथिन मुक्ति, एड्स जागरूकता, नशा मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर जन जागरूकता अभियान चलाया। छात्रा प्रभारी डॉ. भावना शर्मा एवं डॉ. मंजुलता नागरे के मार्गदर्शन में सांस्कृतिक और बौद्धिक सत्र आयोजित किए गए। समापन अवसर पर नगर उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा एवं राजीव शर्मा ने स्वयंसेवकों को मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि युवा वही है जो सूर्य की तरह चमकता है और निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है। शिविर का समापन आह्वान गीत और अनुशासन की शपथ के साथ हुआ।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए एसीटी फॉर्मूला
इसी क्रम में मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार महाविद्यालय में आत्महत्या रोकथाम विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। विशेषज्ञ सौम्या राजपूत (सहायक प्राध्यापक, वनस्पति विज्ञान) ने विद्यार्थियों को एसीटी फॉर्मूले के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अपनी भावनाओं को स्वीकारना, दूसरों की परवाह करना और मन के विचारों को साझा करना ही मानसिक तनाव से मुक्ति का सही रास्ता है।
कार्यक्रम में राजाराम रावते ने आत्महत्या के लक्षणों की पहचान और डॉ. दीपक रजने ने इसके कारणों पर प्रकाश डाला। सह प्रभारी डॉ. पारस बेले ने राष्ट्रीय कार्य बल और मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी प्रदान की।
इनकी रही उपस्थिति
इन आयोजनों के सफल क्रियान्वयन में डॉ. मनमोहन द्विवेदी, डॉ. रागिनी नागर, डॉ. सुरेश सोलंकी, डॉ. लक्ष्मी साहू, डॉ. अरविंद, तकनीकी सहयोगी मनीष मोनिया, अभिषेक बांकरियां और राजाराम रावते का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रमों में 50 से अधिक विद्यार्थी और एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित रहे।



