शाह सतनाम स्कूल का तुगलकी फरमान, पत्रकार की बेटी है, इसलिए स्कूल में नहीं पढ़ाएंगे

सीहोर। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों से जब भेदभाव की खबरें आती हैं तो समाज में गलत संदेश जाता है। ताजा मामला बुधनी के शाह सतनाम स्कूल (अब एम.एस.जी. हाईटेक गुरुकुल गल्र्स स्कूल) का है, जहां एक मासूम बच्ची को सिर्फ इसलिए स्कूल से निकालने की बात कही गई क्योंकि उसके पिता पत्रकार हैं। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और शिक्षा विभाग सहित जिला प्रशासन तक शिकायत पहुँच चुकी है।
बता दें एक निजी चैनल के संवाददाता महेंद्र चौहान की 6 वर्षीय बेटी वेदिका इस स्कूल में केजी-2 की छात्रा है। महेंद्र चौहान ने बताया कि जब वे 30 मार्च को अपनी बेटी का परीक्षा परिणाम लेने स्कूल पहुंचे तो उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया। अन्य परिजनों को मोबाइल ले जाने की अनुमति दी गई, लेकिन महेंद्र का मोबाइल फोन गेट पर ही रखवा लिया गया।
प्राचार्या का विवादित तर्क
पीडि़ता के पिता का आरोप है कि जब उन्होंने इस व्यवहार पर प्राचार्या अमनदीप कौर से बात की तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा चूंकि आप पत्रकार हैं, इसलिए हम आपकी बच्ची को अपने स्कूल में नहीं पढ़ा सकते। जब पत्रकार ने इस बात को लिखित में देने को कहा तो प्राचार्या ने कथित तौर पर धमकी भरे लहजे में कहा कि यदि टीसी पर यह बात लिख दी तो बच्ची का भविष्य खराब हो जाएगा। प्राचार्या ने पत्रकारों को लेकर भी अपमानजनक टिप्पणी की।
पुराने विवादों से नाता
बता दें यह पहली बार नहीं है जब यह स्कूल चर्चा में आया है। पिछले सत्र में भी जोशीपुर की एक दलित छात्रा देवशिखा को फीस न भर पाने के कारण परीक्षा से वंचित करने का मामला सामने आया था। हालांकि बाद में जांच कमेटी ने स्कूल को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन इस ताजा घटनाक्रम ने स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
पीडि़त महेंद्र चौहान ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत बीईओ शशि सिंह और बीआरसी मणिशंकर शर्मा से की है। साथ ही जिला कलेक्टर, एसडीएम और जिला शिक्षा अधिकारी को भी साक्ष्यों ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ पत्र भेजा है।
आवेदन प्राप्त हुआ है
हमें इस मामले में आवेदन प्राप्त हुआ है। यह एक गंभीर विषय है। स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जा रहा है। जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
मणिशंकर शर्मा, बीआरसी बुधनी

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