शरद पूर्णिमा 25 को, बरसेगी अमृत वर्षा और मां लक्ष्मी की कृपा

सीहोर। आरोग्य, भौतिक संपन्नता और आंतरिक चेतना के जागरण का महापर्व शरद पूर्णिमा इस वर्ष 25 अक्टूबर रविवार को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। सनातन पंचांग और आध्यात्मिक परंपरा में वर्षभर में आने वाली सभी पूर्णिमा तिथियों में शरद पूर्णिमा का स्थान सर्वोपरि और अद्वितीय माना गया है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शरद पूर्णिमा की यह पावन रात्रि मानव जीवन में आरोग्य और आंतरिक चेतना के जागरण का काल होती है। पंडित शर्मा ने बताया कि धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की पावन रात्रि माता भगवती महालक्ष्मी के धनअवतरण की रात्रि है। इस विशेष निशा में धन की अधिष्ठात्री देवी मां भगवती महालक्ष्मी अपने वाहन पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती है । श्रद्धालु शरद पूर्णिमा की रात्रि में जागरण, भजन-कीर्तन और मां लक्ष्मी की अनन्य साधना करते हैं माता लक्ष्मी उनके घर में सदा-सदा के लिए स्थायी निवास करती हैं और उनके जीवन को सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और वैभव से परिपूर्ण कर देती हैं।
अमृत वर्षा का आध्यात्मिक रहस्य
पं. शर्मा ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात का आध्यात्मिक और ब्रह्मांडीय रहस्यों से गहरा नाता है। इस रात्रि को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी के सबसे निकट होता है। आध्यात्मिक दृष्टि से जब चंद्रमा अपनी पूर्ण सोलह कलाओं में होता है तो उसकी किरणें औषधीय गुणों और अमृततुल्य ऊर्जा से भर जाती हैं। शरद पूर्णिमा की रात को गौमाता के शुद्ध दूध से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे मिट्टी के पात्र में रखा जाता है। चंद्रमा की अमृतमयी किरणें जब इस खीर पर पड़ती हैं तो यह साधारण भोजन न रहकर एक दिव्य औषधि बन जाती है। उक्त खीर का सेवन करने से शारीरिक व्याधियां और बीमारियां शांत होती हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इम्यूनिटी में वृद्धि होती है।
शरद पूर्णिमा के विशेष आध्यात्मिक उपाय
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शरद पूर्णिमा के प्रदोष काल में जगतपालक भगवान श्रीविष्णु, माता लक्ष्मी और गौमाता का विधिवत पूजन कर गाय के दूध से बनी सफेद खीर अथवा मखाने की खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। रात्रि को कनकधारा स्तोत्र, श्री सूक्त और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना परम फलदाई माना गया है यह पाठ साधक के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ भौतिक समृद्धि प्रदान करता है शरद पूर्णिमा भौतिक संपन्नता के साथ-साथ हमें अपनी आंतरिक चेतना और आत्मा को भी जाग्रत करना चाहिए। इस पावन रात्रि को अधिक से अधिक समय जप, ध्यान में व्यतीत करें।

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