सलकनपुर दर्शन करने जा रही शिवानी की सडक़ हादसे में मौत, परिजनों ने अंगदान कर तीन मरीजों को दी नई जिंदगी

एम्स भोपाल में ब्रेन स्टेम डेड घोषित होने के बाद मजदूर परिवार ने दिखाई मानवता, एक किडनी एम्स और दूसरी किडनी-लिवर बंसल अस्पताल में हुए ट्रांसप्लांट

सीहोर। शारदीय नवरात्रि के पवित्र दिनों में माता के दर्शन की चाह लेकर घर से निकली एक महिला की सडक़ हादसे में मौत हो गई। नर्मदापुरम जिले की रहने वाली इस महिला की मौत के बाद उसके गरीब मजदूर परिवार ने जो फैसला लिया, वह समाज के लिए एक मिसाल बन गया है। परिजनों ने दुख की इस घड़ी में अंगदान का निर्णय लिया, जिससे तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल गया है।
बता दें नर्मदापुरम जिले की बांकीखेड़ी तहसील के खापा खुर्द गांव की रहने वाली बिलाश टांटी शर्मा उर्फ शिवानी (32 वर्ष) अपने परिवार के साथ सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी के दर्शन के लिए निकली थीं। रास्ते में अचानक हुए एक सडक़ हादसे में उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। परिजन तुरंत उन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए एम्स भोपाल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार गत 14 अक्टूबर को एम्स के डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया।
तीन को मिली नई जिंदगी
अपनों को खोने के गहरे सदमे के बावजूद शिवानी के मजदूर परिवार ने अस्पताल में बड़ा दिल दिखाते हुए अंगदान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। एम्स भोपाल की ट्रांसप्लांट समन्वय टीम ने परिजनों से इस संबंध में चर्चा की थी, जिस पर उन्होंने सहर्ष सहमति जता दी। चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके तहत शिवानी की एक किडनी एम्स भोपाल में ही एक जरूरतमंद मरीज को ट्रांसप्लांट की गई, जबकि उनकी दूसरी किडनी और लिवर को प्राथमिकता के आधार पर बंसल अस्पताल में प्रत्यारोपित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में दोनों अस्पतालों की मेडिकल टीमों ने बेहतरीन समन्वय दिखाया।
एम्स भोपाल में साल 2026 का पांचवां अंगदान
एम्स भोपाल के प्रबंधन के अनुसार संस्थान में यह कुल सातवां अंगदान है, जबकि वर्ष 2026 के दौरान अब तक पांच सफल अंगदान हो चुके हैं। सलकनपुर दर्शन की अधूरी रही यात्रा भले ही थम गई हो, लेकिन शिवानी का परिवार जाते-जाते दूसरों की जिंदगियों में रौशनी भर गया।

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