
भोपाल/हरदा। समाजसेवी भाजपा नेता एवं साहित्यकार पयोज जोशी ने अपने पूज्य पिताजी स्वर्गीय डॉ. मूलाराम जी जोशी की पावन स्मृति में एक अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी पहल करते हुए अपनी एक एकड़ भूमि सेवा भारती, मध्य भारत प्रांत जिला हरदा को समर्पित की है। यह भूमि सेवा भारती द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन एवं सामाजिक समरसता के विभिन्न सेवा प्रकल्पों के संचालन और विस्तार के लिए उपयोग में लाई जाएगी। इस समर्पण से क्षेत्र के जरूरतमंद एवं वंचित समाज को सेवा गतिविधियों का व्यापक लाभ मिलेगा।
पिताजी की स्मृति में सम्मान भी शुरू किया –
पयोज जोशी मूलतः ग्राम खुदिया जिला हरदा के निवासी हैं। हालांकि उनकी शिक्षा राजधानी भोपाल में हुई एवं नगरीय प्रशासन विभाग में नौकरी भी की। बचपन से समाजसेवा में सक्रिय रहते हुए लोगों की मदद करते रहे। उन्होंने अपनी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर समाजसेवा के कई अनुकरणीय कार्य भी किए। उनके पिताजी डॉ. मुलाराम जोशी अपने शिक्षाकाल में भोपाल आ गए थे। उन्होंने यहां शिक्षा ग्रहण की एवं बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में कई अहम पदों पर सेवा भी दी। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं। डॉ. मुलाराम जोशी के निधन के बाद उनके पुत्र पयोज जोशी ने उनकी स्मृति में साहित्य के क्षेत्र में सम्मान भी शुरू किया है। हर साल एक साहित्यकार को सम्मानित किया जाता है।
अनुकरणीय पहल के लिए किया सम्मान –
भूमि समर्पण के अवसर पर सेवा भारती के अध्यक्ष नटवर भाई पटेल, सचिव दीपक सोनी, कोषाध्यक्ष बालमुकुंद गौर, बल्लभदास, तोषनीवाल, सुभाष शुक्ला, संजय माकवे, अशोक देशमुख सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस मौके पर उपस्थित पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने पयोज जोशी का संस्कार स्कूल हरदा में स्वागत माला, शाल एवं श्रीफल से सम्मान किया और उनके इस सेवा भाव की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व और परोपकार की ऐसी भावना ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। स्वर्गीय डॉ. मूलाराम जी जोशी की स्मृति में किया गया यह भूमि दान उनके सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों को जीवंत बनाए रखने का प्रेरणादायी प्रयास है। सेवा भारती परिवार ने पयोज जोशी एवं उनके परिवार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इस भूमि पर भविष्य में संचालित होने वाले सेवा प्रकल्प शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होंगे तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने के संकल्प को साकार करेंगे।