शुगर मिल के मजदूरों का 27 साल का वनवास, सीएम को लिखा पत्र, न्याय की गुहार

सीहोर। मध्यप्रदेश की कभी सबसे बड़ी पहचान रही सीहोर शुगर मिल और जगमानक सॉल्वेंट प्लांट के बंद होने से उपजा दर्द एक बार फिर सतह पर आ गया है। मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ रहे घनश्याम यादव ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक भावुक और तीखा पत्र लिखा है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि पिछले 27 वर्षों से 1500 परिवारों का भविष्य अंधकार में है, लेकिन न विधानसभा और न ही लोकसभा में इन गरीबों की आवाज गूंजी।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि मिल बंद होने के बाद से अब तक 100 से अधिक मजदूरों की मौत पैसों के अभाव में सही इलाज न मिलने के कारण हो चुकी है। कई मजदूरों के बच्चे शिक्षा से वंचित होकर दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं। यादव ने मानवाधिकार आयोग और अन्य संगठनों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं कि इतने बड़े मानवीय संकट पर किसी ने ठोस कदम नहीं उठाया।
राजनीति की भेंट चढ़ी मिल
घनश्याम यादव ने आरोप लगाया कि राजनीतिक षड्यंत्र के तहत इस मिल को बंद कर दिया गया था और इसके विकल्प के रूप में राघौगढ़ में नई मिल शुरू की गई थी। उस समय मिल में लगभग 1500 स्थायी कर्मचारी कार्यरत थे, जिनका पीएफ कटता था। मिल बंद होने के बाद कर्मचारियों ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन न्याय की उम्मीद आज भी अधूरी है।
करोड़ों की जमीन, पीएफ का अता-पता नहीं
मजदूरों का कहना है कि भविष्य निधि संगठन ने भी उन कंपनियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जिन्होंने मजदूरों का पीएफ जमा नहीं किया। पत्र में सरकार का ध्यान इस ओर भी दिलाया गया है कि शुगर मिल के पास अपनी 150 एकड़ निजी जमीन और लगभग 5000 एकड़ लीज की जमीन है। राज्य सरकार को इस बेशकीमती जमीन और मिल के संसाधनों का उपयोग कर मजदूरों के बकाया भुगतान और रोजगार के हित में कोई ठोस नीति बनानी चाहिए।

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