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अमलाहा के खेतों में उतरी देश की कृषि कैबिनेट

शिवराज बोले, दिल्ली-भोपाल के क्रांकीट के नहीं हो सकता खेती पर विचार

सीहोर। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का शनिवार को एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। अमलाहा में आयोजित राष्ट्रीय दलहन सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा आज की यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण है, जिसे हमने दिल्ली या भोपाल के बंद कमरों में नहीं किया। सीमेंट-क्रांकीट के जंगलों में खेती के बारे में ढंग से विचार नहीं हो सकता, इसलिए हम खेतों के बीच आकर मंथन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए चौहान ने घोषणा की कि अब देश के गांवों को बीज ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि किसानों को उन्नत बीजों के लिए दर-दर न भटकना पड़े।
प्रयोगशाला से खेत तक की दूरी होगी खत्म
अमलाहा की धरती पर जुटे देशभर के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों के बीच शिवराज सिंह चौहान ने दाल क्रांति का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत को दलहन उत्पादन में दुनिया का सिरमौर बनाना हमारा लक्ष्य है। सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ अनेक राज्यों के कृषि मंत्री भी इस पवित्र धरा पर पहुंचे। सभी अतिथियों ने इकार्डा और आईसीएआर द्वारा विकसित उन्नत किस्मों का खेतों में जाकर अवलोकन किया और किसानों से सीधा संवाद कर उनकी जमीनी समस्याएं सुनीं।
अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का लोकार्पण
खेती को आधुनिक विज्ञान और अनुसंधान से जोडऩे के लिए अमलाहा में कई बड़ी अधोसंरचनाओं का लोकार्पण किया गया। प्लांट जीनोमिक्स, टिश्यू कल्चर, प्लांट ब्रीडिंग और प्लांट पैथोलॉजी जैसी आधुनिक प्रयोगशालाओं की शुरुआत हुई। किसानों को डिजिटल माध्यम से नई तकनीकों की जानकारी देने के लिए पोर्टल लॉन्च किया। साथ ही किसानों के कौशल विकास के लिए प्रशासनिक भवन और प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ किया गया।
प्रगतिशील किसानों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया और उन्हें उन्नत बीजों की किट प्रदान की। ऑडिटोरियम में आयोजित तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने दलहनी फसलों में रोग प्रबंधन, एमएसपी पर समय पर खरीदी, बीज उत्पादन संवर्धन और यंत्रीकरण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब गांव-गांव में उन्नत बीज तैयार होंगे, तभी देश दालों के आयात की मजबूरी से मुक्त होगा। उन्होंने अमलाहा के अनुसंधान केंद्र की तारीफ करते हुए कहा कि यहां हो रहे प्रयोग भारत के कृषि भविष्य को बदल देंगे। बैठक में मौजूद विशेषज्ञों ने माना कि प्रयोगशाला से खेत तक की दूरी मिटाने का यह अभियान किसानों की आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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