
सीहोर। जिले में बिजली बिलों की वसूली को लेकर बिजली विभाग ने अब आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर ट्रैक्टर कुर्की के वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि बकायादारों के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई जारी है। लेकिन इस कार्रवाई ने एक बड़ा मानवीय और आर्थिक सवाल खड़ा कर दिया है, जब किसान की जेब खाली है तो वह बिल कहां से भरे।
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के उप महाप्रबंधक संजीव सिंह ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पिछले दिनों ग्राम रलावती में बड़ी कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता मोर सिंह के दो कनेक्शनों घरेलू और कृषि पंप पर कुल 67 हजार 806 रुपये की राशि बकाया थी। विभाग के अनुसार उपभोक्ता को 12 मार्च को अंतिम नोटिस और समाधान योजना का लाभ लेने का अवसर दिया गया थाए लेकिन राशि जमा न होने पर नियमानुसार ट्रैक्टर कुर्क कर लिया गया।
किसानों की चौतरफा घेराबंदी
बिजली कंपनी की यह कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब किसान चारों तरफ से समस्याओं से घिरा है, वर्तमान में किसानों की उपज खेतों में तैयार खड़ी है, जिसकी कटाई और थ्रेसिंग के लिए ट्रैक्टर की सबसे ज्यादा जरूरत है। सीहोर की कृषि मंडियों में अवकाश होने और समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रक्रिया अब तक पूरी तरह रफ्तार न पकड़ पाने के कारण किसान के पास नकद राशि का अभाव है। जिस ट्रैक्टर के दम पर किसान अपनी फसल मंडी तक पहुंचाकर कर्ज चुकाने की उम्मीद कर रहा था, विभाग उसी ट्रैक्टर को उठाकर ले जा रहा है।
सत्ता पक्ष मौन, कांग्रेस हमलावर
किसानों की इस बदहाली और कुर्की के डर पर जिले के सत्ताधारी दल के नेताओं ने चुप्पी साध रखी है। वहीं कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार एक तरफ किसान हितैषी होने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर गनमैन के साये में किसानों के घरों से ट्रैक्टर उठवाए जा रहे हैं।
जनता में भारी आक्रोश
ग्रामीण क्षेत्रों में इस पुलिसिया अंदाज वाली वसूली से भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग को कम से कम फसल बिकने तक का इंतजार करना चाहिए था। महज कुछ हजार की बकाया राशि के लिए लाखों का ट्रैक्टर कुर्क करना अन्नदाता के साथ अन्याय है।