3 मार्च को दिखाई देगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, सुबह 9.45 से शुरू होगा सूतक काल

सीहोर। वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा यानी 3 मार्च मंगलवार को लगने जा रहा है। भारत में यह ग्रस्तोदय खंडग्रास चंद्र ग्रहण के रूप में दिखाई देगा। ज्योतिषाचार्य पंडित सुनील शर्मा के अनुसार यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा। भारत में दृश्य होने के कारण इसका धार्मिक महत्व और सूतक काल भी प्रभावी रहेगा।
पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि ग्रहण का स्पर्श शाम 6 बजकर 25 मिनट पर होगा और इसका मोक्ष समाप्ति शाम 6 बजकर 48 मिनट पर होगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 23 मिनट की रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। अत: 3 मार्च को सुबह 9.45 बजे से सूतक लग जाएगा। सूतक काल शुरू होते ही जिले के सभी देवालयों और मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण और विशेष पूजा-अर्चना के बाद ही दर्शन पुन: प्रारंभ होंगे।
गर्भवती महिलाओं और आमजन के लिए सावधानी
ग्रहण काल को आध्यात्मिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। पंडित शर्मा के अनुसार सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, मूर्तियां स्पर्श करना और बाल या नाखून काटना वर्जित है बालक, वृद्ध और रोगियों को छोडक़र। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं घर से बाहर न निकलें और चाकू या कैंची जैसी तेजधार वस्तुओं का प्रयोग करने से बचें। भोजन और पानी को अशुद्ध होने से बचाने के लिए उनमें तुलसी पत्र या कुश डालें। ग्रहण के बाद गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करना उत्तम है।
राशियों पर कैसा होगा प्रभाव
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार इस ग्रहण का अलग-अलग राशियों पर मिला-जुला असर रहेगा। वृषभ, मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण उन्नति और शुभ फल देने वाला रहेगा। मेष, धनु और मीन राशि वालों के लिए फल सामान्य रहेगा। कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
पुण्य लाभ के लिए करें दान
पंडित शर्मा के अनुसार ग्रहण के दौरान मंत्र जाप, ईश वंदना और आत्मचिंतन को श्रेष्ठ माना गया है। ग्रहण समाप्ति के बाद सफेद वस्तुओं जैसे सफेद वस्त्र, चावल, चीनी, दूध या कपूर का दान करना विशेष फलदायी बताया गया है।

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