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रसूख का असर, वीआईटी प्रबंधन के आगे नगर परिषद ‘बेबस’

10 माह से 6 नोटिसों को बनाया रद्दी, 42 लाख का शुल्क बकाया

सीहोर। वीआईटी कैंपस में छात्रों के हंगामे के बाद अब प्रबंधन के रसूख और मनमानी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन विभाग के तहत आने वाली नगर परिषद कोठरी द्वारा बार-बार भेजे जा रहे नोटिसों को वीआईटी प्रबंधन लगातार नजरअंदाज कर रहा है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रबंधन स्थानीय निकाय की वैधानिक कार्रवाई को अपने रसूख के दम पर टालने की कोशिश कर रहा है।
बता दें फरवरी 2024 से अक्टूबर 2024 के बीच कोठरी नगर परिषद ने नामांतरण, बिल्डिंग परमिशन और फायर एनओसी जैसे गंभीर उल्लंघनों के लिए वीआईटी ट्रस्टी श्री शंकर विश्वनाथन को छह बार से अधिक सूचना पत्र भेजे, लेकिन कोई तवज्जो नहीं मिली। 29 फरवरी, 22 मई, 20 जून और 22 जुलाई 2024 को भेजे गए नोटिसों का उद्देश्य संपत्ति स्वामित्व दस्तावेज और बिना परमिशन बनी इमारतों की परमिशन लेना था।
3 दिन की अंतिम चेतावनी का भी नहीं असर
नगर परिषद कोठरी ने 2 अक्टूबर और 9 अक्टूबर 2024 को अंतिम सूचना पत्र जारी करते हुए 3 दिवस में कार्यवाही पूरी करने की चेतावनी दी थी, जिसके पूरा न होने पर मप्र नपा अधिनियम 1961 की धारा 150/187 के तहत वैधानिक कार्यवाही की बात कही गई थी, लेकिन प्रबंधन पर इसका भी कोई असर नहीं हुआ।
धमकी भी बेअसर
प्रबंधन की इस अनदेखी का सबसे बड़ा परिणाम 11 इमारतों पर फायर एनओसी न लेने के कारण 42 लाख 40 हजार 122 रुपए का भारी जुर्माना है। 2 अक्टूबर 2024 के पत्र में वसूली के लिए जंगम संपत्ति की कुर्की और छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए संस्था की मान्यता निरस्त करने हेतु शासन को प्रस्ताव भेजने की चेतावनी भी दी गई, लेकिन वीआईटी प्रबंधन इन गंभीर चेतावनियों को लगातार रद्दी समझ रहा है। सीएमओ नरेन्द्र जाटव के अनुसार नोटिसों का न तो जवाब मिला है और न ही जुर्माना राशि जमा कराई गई है।

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