
सीहोर। आज का दिन खुशियों और उत्साह का है। जिले भर की सडक़ें बारातों से गुलजार हैं, मैरिज गार्डन आवभगत के लिए तैयार हैं और शहनाइयों की मंगल ध्वनि गूंज रही है। लेकिन इस उत्सव के माहौल के पीछे एक गहरा तनाव भी पनप रहा है। विडंबना देखिए कि जिन घरों में आज मंगल गीत गाए जाने चाहिए, वहां परिवार के मुखिया और कैटरर्स पंडित जी के मुहूर्त से ज्यादा गैस सिलेंडर की डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं।
बता दें प्रदेश सरकार द्वारा कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर अचानक लगाई गई रोक ने शादी वाले घरों की नींद उड़ा दी है। सीहोर के लगभग सभी मैरिज गार्डन आज बुक हैंए हलवाइयों ने कढ़ाही चढ़ा दी है और मेहमानों का आगमन शुरू हो चुका है। लेकिन रसोई में ईंधन खत्म होने की कगार पर है। महीनों पहले शादियों की प्लानिंग करने वाले परिवारों के सामने अब यह संकट खड़ा हो गया है कि सैकड़ों मेहमानों के लिए गरमा-गरम खाना कैसे तैयार होगा।
घराती-बराती दोनों परेशान
मुख्यालय स्थित एक मैरिज गार्डन के बाहर खड़े परिजनों का कहना है कि उन्होंने सब कुछ तय समय पर व्यवस्थित किया था, लेकिन ऐन वक्त पर सिलेंडरों की किल्लत ने सारा गणित बिगाड़ दिया है। कैटरर्स का साफ कहना है कि उनके पास पुराना स्टॉक खत्म हो रहा है और नए सिलेंडर मिल नहीं रहे। फोन घनघना रहे हैं, सिफारिशें लगाई जा रही हैं, लेकिन समाधान नजर नहीं आ रहा। स्थिति यह है कि उत्सव के बीच लोग गैस सिलेंडरों की जुगाड़ के लिए माथापच्ची कर रहे हैं।
परंपरा बनाम प्रशासनिक पेच
भारतीय परंपरा में मेहमानों को खाली हाथ या बिना भोजन के विदा करना अशुभ माना जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन और सरकार की इस खींचतान का खामियाजा आम जनता को अपनी खुशियों में खलल डालकर भुगतना पड़ेगा। अचानक लिए गए इस फैसले ने न केवल मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर असर डाला है, बल्कि उनकी सामाजिक साख को भी दांव पर लगा दिया है।
वैकल्पिक रास्ता निकाले प्रशासन
फिलहाल शादियों में संगीत और रस्मों से ज्यादा चर्चा गैस सिलेंडरों की किल्लत पर हो रही है। आम जनता और मैरिज गार्डन संचालकों की मांग है कि शादियों के इस भारी मुहूर्त को देखते हुए प्रशासन को तुरंत कोई वैकल्पिक रास्ता निकालना चाहिए, ताकि किसी घर की खुशियों में अंधेरा न हो और दावतें प्रशासनिक फाइलों में न दब जाएं।