जयकारों से गुंजायमान हुए देवालय, देर रात तक चले भंडारे

सीहोर। संकटमोचन भगवान हनुमान की जयंती का पर्व गुरुवार को पूरे जिले में अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में घंटियों की गूंज और जय श्री राम के जयकारों ने वातावरण को भक्तिमय कर दिया। शहर के मण्डी क्षेत्र, गंज और सीवन नदी के तट पर स्थित मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।
बता दें हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में शहर के विभिन्न चौराहों और मंदिरों के बाहर विशाल भंडारों का आयोजन किया गया। मण्डी और गंज क्षेत्र में विशेष रूप से भव्य आयोजन हुए, जहां श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। शाम होते-होते पूरा शहर केसरी ध्वजों से पट गया और जगह-जगह सुंदरकांड व हनुमान चालीसा के पाठ गूंजते रहे।
प्राचीन मंदिरों की महिमा है निराली
जिले में स्थित कई ऐसे ऐतिहासिक मंदिर हैं, जहां विशेष अभिषेक और चोला अर्पण किया गया। सीवन नदी के तट पर स्थित इस मंदिर का इतिहास मराठा काल से जुड़ा है। यहां हनुमान जी की 9 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा विराजमान है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां हनुमान जी की दृष्टि सीधे भगवान राम के चरणों पर पड़ती है। यहां प्रति मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, जबकि हनुमान जयंती के अवसर पर सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं के आने जाने का सिलसिला बना रहा।
खड़े हनुमान पर भी उमड़े श्रद्धालु
इसी तरह रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्थित खड़े हनुमान मंदिर में भक्तों का विशेष जमावड़ा रहा। 1947 में किसान नन्नूलाल कुशवाह द्वारा कुएं की खुदाई के दौरान प्रकट हुई यह प्रतिमा युद्ध मुद्रा में है। यहां हनुमान जी एक हाथ में गदा और दूसरे में संजीवनी पर्वत लिए हुए हैं। आस्था है कि यहां लगाई गई अर्जी कभी खाली नहीं जाती।
मठ मंदिर पर गूंजे जयकारे
इसी तरह सीवन नदी के दूसरे छोर पर स्थित करीब 267 साल पुराने मठ मंदिर में भी जयंती का विशेष आयोजन हुआ। सिद्ध नरहरि दास महाराज की तपोभूमि रहे इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां आज भी सूक्ष्म रूप में भजन-कीर्तन की ध्वनियां सुनाई देती हैं। यहां 5 से 7 मंगलवार दर्शन की विशेष परंपरा है। बता दें हनुमान जयंती के अवसर पर सभी प्रमुख मंदिरों में विशेष श्रृंगार किया गया। महाआरती के बाद प्रसादी वितरण का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।



