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यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सडक़ों पर उतरा सवर्ण समाज, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

सीहोर। उच्च शिक्षण संस्थानों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी द्वारा लागू किए गए नवीन नियमों के विरोध में सवर्ण समाज ने उग्र प्रदर्शन किया। समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्र होकर जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर इन नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की।
सवर्ण समाज का आरोप है कि नए नियम शिक्षा के वातावरण को दूषित कर रहे हैं। सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यूजीसी के ये नियम योग्यता आधारित शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करते हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि नए प्रावधानों से समाज में भ्रम, असुरक्षा और वैमनस्य की भावना पैदा हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह कानून वापस नहीं लिया तो आने वाले समय में दिल्ली कूच कर बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
संविधान के अनुच्छेदों का दिया हवाला
सात सूत्रीय ज्ञापन में समाज के नागरिकों, अभिभावकों और छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार, अनुच्छेद 19 पेशे की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार का सीधा उल्लंघन है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि कानून की भाषा अस्पष्ट और भ्रामक हैए जिसका दुरुपयोग होने की पूरी आशंका है।
छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षण संस्थान राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं, उन्हें जाति आधारित प्रयोगशाला नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कम उम्र के छात्र अक्सर राजनीतिक षड्यंत्र या क्रोध का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में यदि किसी सामान्य वर्ग के छात्र पर झूठा आरोप लगाकर कानूनी कार्रवाई की जाती है तो उसका भविष्य अंधकार में डूब जाएगा।
प्रमुख मांगें
– यूजीसी के नए नियमों को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
– शिक्षा नीति में सभी वर्गों के छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित हों।
– शिकायतों की जांच निष्पक्ष हो और सभी के लिए समान दंड का प्रावधान हो।
– कानून की परिभाषा केवल शिक्षण तक ही सीमित रहे।

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