
सीहोर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। वहीं जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत जमोनिया में जमीनी हकीकत इसके उलट है। यहां के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और कर्मचारी पीएम मोदी के सपनों को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। गांव की मुख्य सडक़ों पर बहता गंदा पानी और बदबूदार माहौल पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीण विनोद बड़ोदिया ने बताया कि जमोनिया गांव की आबादी लगभग ढाई हजार है। यहां की दौलतपुर डीपी वाली सडक़ की हालत सबसे ज्यादा खराब है। नाली निर्माण न होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे मुख्य सडक़ पर जमा हो रहा है। स्थिति यह है कि सडक़ पर गंदा पानी उफान मार रहा है, जिससे न केवल आवागमन बाधित हो रहा है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। दिन भर ग्रामीण इसी गंदगी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं।
चुनावी वादे हुए हवा-हवाई
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय सरपंच पति राकेश मेवाड़ा ने बड़े बड़े वादे किए थे, लेकिन कुर्सी मिलते ही वे सब भूल गए। इस मार्ग पर खाटू नरेश का मंदिर निर्माण भी होना है, लेकिन सडक़ की इस दुर्दशा के कारण श्रद्धालुओं और निर्माण कार्य में काफी परेशानी आएगी। ग्रामीणों ने कई बार सरपंच पति राकेश मेवाड़ा और सचिव मोहन मेवाड़ा से नाली निर्माण की गुहार लगाई, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
शिकायत लेकर जाने पर मिलता है अभद्र व्यवहार
पंचायत की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर ग्राम पंचायत कार्यालय जाते हैं तो सरपंच और सचिव का व्यवहार उनके प्रति सहयोगात्मक नहीं रहता। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय उनसे ठीक से बात तक नहीं करते, जिससे लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।
ग्रामीणों की चेतावनी
जमोनिया के निवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द दौलतपुर डीपी वाली सडक़ पर नाली का निर्माण कराया जाए। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।