पेयजल की गुणवत्ता में न हो लापरवाही, पाइपलाइन के आखिरी छोर तक होगी पानी की जांचश्: कलेक्टर
कलेक्टर ने टीएल बैठक में दिए निर्देश

सीहोर। जिले के नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह निर्देश कलेक्टर बालागुरू के. ने सोमवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा बैठक के दौरान अधिकारियों को दिए।
इंदौर की हालिया घटनाओं और जल जनित रोगों की आशंका को देखते हुए कलेक्टर ने पीएचई विभाग, जनपद सीईओ और नगरीय निकायों के सीएमओ को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। उन्होंने निर्देशित किया कि पेयजल पाइपलाइन की शुरुआत से लेकर अंतिम छोर तक विभिन्न स्थानों से नियमित रूप से पानी के सैंपल लिए जाएं। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि कहीं सुधार की आवश्यकता है तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए ताकि सुरक्षित पानी हर घर तक पहुंचे।
कम वर्षा के चलते जल संरक्षण की अपील
कलेक्टर ने बैठक में स्पष्ट किया कि इस वर्ष औसत से कम वर्षा हुई है, जिसे देखते हुए आगामी महीनों के लिए अभी से कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने आवश्यकता पडऩे पर निजी नलकूपों और बोरवेल के अधिग्रहण के लिए भी तैयार रहने को कहा। साथ ही उन्होंने कृषि और राजस्व विभाग को निर्देश दिए कि किसानों और आम नागरिकों को जल के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए जागरूक करें।
ठंड से राहत के लिए अलाव और रैन बसेरे
लगातार गिरते तापमान को देखते हुए कलेक्टर ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सभी सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिले के सभी रैन बसेरे 24 घंटे खुले रहें और वहां बिस्तरए पानी व अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों ताकि किसी भी बेसहारा व्यक्ति को ठंड में परेशानी न हो। बैठक में जिला पंचायत सीईओ सर्जना यादव, अपर कलेक्टर वृंदावन सिंह सहित सभी विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
मतदाता पुनरीक्षण: अनमैप मतदाताओं को शत प्रतिशत नोटिस भेजकर मतदाता सूची में नाम जोडऩे की प्रक्रिया पूरी की जाए। 18 वर्ष पूर्ण करने वाले युवाओं के लिए कॉलेजों में विशेष कैंप लगाए जाएं।
भावान्तर भुगतान योजना: सोयाबीन किसानों के लंबित भुगतान तत्काल किए जाएं। व्यापारियों द्वारा रिसायकल की गई सोयाबीन की मंडी बिक्री न हो, इसके लिए कड़ी निगरानी रखी जाए।
वन भूमि अनुमति: जनहित के निर्माण कार्यों के लिए वन विभाग नियमानुसार शीघ्र अनुमति प्रदान करे ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।
प्राकृतिक खेती: किसानों की आय बढ़ाने और मृदा स्वास्थ्य के लिए जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए।


