
सीहोर। जिले में राजनीति और नर्मदा मैया का रिश्ता अटूट है, लेकिन जब बात भक्ति और सेवा की कठिन अग्निपरीक्षा की आती है तो बड़े-बड़े दिग्गज पीछे छूट जाते हैं। बुधनी विधानसभा क्षेत्र जहां का हर चुनाव नर्मदा के अस्तित्व, रेत के अवैध उत्खनन और पर्यावरण संरक्षण के दावों पर टिका होता है, वहां एक हैरान करने वाली हकीकत सामने आई है। क्षेत्र के तमाम बड़े पदों पर बैठे जनप्रतिनिधि चाहे वे भाजपा के हों या कांग्रेस के नर्मदा नदी की वास्तविक स्थिति को जानने आज तक नर्मदा की पैदल परिक्रमा करने का साहस नहीं जुटा पाए हैं। कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल क्षेत्र के इकलौते ऐसे नेता बन गए हैं, जिन्होंने 3300 किलोमीटर की दुर्गम नर्मदा पदयात्रा को पैदल पूर्ण किया है। नर्मदा परिक्रमवासी विक्रम मस्ताल से सीहोर हलचल ने सीधी बात कर इस यात्रा के अनुभवों को जाना है।
बता दें रामायण में ‘हनुमान जी’ के जीवंत अभिनय से करोड़ों दिलों को जीतने वाले विक्रम मस्ताल ने 3 नवंबर को ओंकारेश्वर से अपनी यह पदयात्रा शुरू की थी। 100 दिनों तक चली इस दुर्गम यात्रा का समापन कर मस्ताल ने सलकनपुर धाम के ग्राम इटारसी स्थित अपने निवास पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी गहण की।
सियासत को बहुत कुछ दे चुकी बुधनी
बुधनी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस के बड़े नेताओं की लंबी चौड़ी लिस्ट है। रोचक बात यह है कि नर्मदा मैया का नाम लेकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचने वाले इन नेताओं में से किसी ने भी आज तक पदयात्रा कर नर्मदा की जमीनी वस्तुस्थिति जानने का प्रयास नहीं किया। जबकि बुधनी की इस धरती ने सियासत के मामले में प्रदेश से लेकर देश को बहुत कुछ दे दिया है।
परिक्रमावासी विक्रम मस्ताल से सीधी बात
सवाल: बुधनी के किसी भी बड़े जनप्रतिनिधि ने आज तक नर्मदा की पैदल परिक्रमा नहीं की, आपने यह कठिन यात्रा क्यों चुनी?
जवाब: राजनीति अपनी जगह है, लेकिन नर्मदा मेरी आस्था है। मैंने यह यात्रा वोट के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और नर्मदा मैया के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए की है। बाकी नेताओं की अपनी प्राथमिकताएं हो सकती हैं, लेकिन मेरे लिए मैया की गोद से बढक़र कुछ नहीं।
सवाल: 100 दिनों की यात्रा के दौरान आपको नर्मदाजी की वास्तविक स्थिति क्या दिखी?
जवाब: जमीनी हकीकत देखकर मन दुखी होता है। कई जगहों पर अवैध उत्खनन के घाव साफ दिखते हैं और फैक्ट्रियों का गंदा पानी पवित्र जल में मिल रहा है, जो लोग मंचों से संरक्षण की बात करते हैं, उन्हें एक बार पैदल चलकर यह बर्बादी देखनी चाहिए।
सवाल: यात्रा के दौरान लोगों ने आपको ‘हनुमानजी’ के रूप में देखा। क्या आपकी यह धार्मिक छवि राजनीति में मदद करेगी?
जवाब: लोगों का प्यार है कि वो मुझे हनुमान के रूप में देखते हैं। हनुमान जी सेवा के प्रतीक हैं और मैं भी राजनीति को केवल सेवा का माध्यम मानता हूं। अगर मेरी इस छवि से लोगों का मुझ पर भरोसा बढ़ता है तो मैं उनकी सेवा के लिए और भी प्रतिबद्ध रहंूगा।
सवाल: नर्मदा के संरक्षण के लिए अब आपके क्या विशेष प्रयास होंगे?
जवाब: नर्मदा सेवा संरक्षण सेना के माध्यम से हम युवाओं की एक बड़ी फौज तैयार कर रहे हैं। हम हर उस गतिविधि का विरोध करेंगे जो नर्मदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सवाल: अब राजनीति में आपकी अगली क्या प्लानिंग है?
जवाब: मेरी योजना स्पष्ट है जनता के बीच रहना और उनके हक की लड़ाई लडऩा। इस यात्रा ने मुझे लोगों की तकलीफों को बहुत करीब से दिखाया है। अब मेरी राजनीति का मुख्य केंद्र क्षेत्र की सेवा और नर्मदा संरक्षण ही रहेगा।