इस बार सीहोर में जले दो अनोखे रावण, एक कांग्रेस ने तो दूसरा जलाया किसानों ने…

सीहोर। विजयादशमी के पावन पर्व पर बुराई के प्रतीक रावण दहन की परंपरा तो हर साल निभाई जाती है, जिले में इस बार का दशहरा बेहद अनूठा और चर्चा का विषय बन गया। यहां एक ही दिन दो अलग-अलग जगहों पर अनोखे अंदाज में रावण दहन किए गए। एक ओर जहाँ कांग्रेस पार्टी ने चुनावी अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नाम का पुतला जलाया, वहीं दूसरी ओर आक्रोशित किसानों ने विद्युत मंडल के अधिकारियों के कथित घमंड और लापरवाही के प्रतीक के रूप में 10 सिर वाला रावण फूंक दिया।
पहला अनोखा दहन, कांग्रेस का बस स्टैंड पर प्रदर्शन
जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा स्थानीय बस स्टैंड पर एक विरोध प्रदर्शन किया गया। अखिल भारतीय और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशों के तहत आयोजित इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने चंदा चोरी और वोट चोरी के गंभीर मुद्दे उठाए। जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने इलेक्टोरल बॉन्ड और चुनावी अनियमितताओं पर सवाल खड़े किए। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। इस विरोध प्रदर्शन में घनश्याम यादव, विष्णु प्रसाद राठौर, रमेश गुप्ता, सुनील दुबे, डॉ. अनीस खान, पंकज शर्मा, मजीद अंसारी, अरबाज खान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

किसानों ने फूंका बिजली विभाग के घमंड का रावण
जिले में दूसरा अनोखा रावण दहन किसानों द्वारा किया गया। किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में लगभग 25 गांवों के किसानों ने विद्युत मंडल की कथित लापरवाही और तानाशाही के विरोध में अनोखा मोर्चा खोला। किसानों ने 10 सिर वाला रावण बनाकर उसका दहन किया, जिसके हर एक सिर पर बिजली व्यवस्था से जुड़ी उनकी 10 प्रमुख मांगें और सवाल लिखे हुए थे। हाथों में तख्तियां और ढोल-नगाड़े लेकर पहुंचे किसानों का यह प्रदर्शन शहर में चर्चा का केंद्र रहा।

क्या हैं किसानों के मुख्य आरोप और मांगे
मुआवजे और नौकरी की मांग: किसानों की मुख्य मांग है कि ग्राम बरबेली के किसान सतीश मेवाड़ा, जो खेतों में झूलते 11 केवी और एलटी बिजली के तारों की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे, उन्हें 25 लाख रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई: इसके अलावा ग्राम मोरिया की किसान महिला सुकनबाई मेवाड़ा की करंट लगने से हुई मौत के मामले में भी जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की माँग की गई।
चार महीने से जारी है आंदोलन, भोपाल तक चेतावनी
किसानों का कहना है कि वे पिछले चार महीने से सीहोर और आसपास के इलाकों में बिजली विभाग की लापरवाहियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, मानवाधिकार आयोग और जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विरोध जताने वाले किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पीडि़त परिवारों को न्याय नहीं मिला और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आने वाले दिनों में भोपाल में उग्र आंदोलन करेंगे। इस प्रदर्शन में प्रहलाद सिंह मेवाड़ा और लक्ष्मण सिंह मेवाड़ा सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।

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