
सीहोर। जिला मुख्यालय के समीप स्थित पचामा इंडस्ट्रियल एरिया इस समय एक बड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट की चपेट में है। यहां नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही एक पनीर फैक्ट्री ने इलाके में सफेद जहर का तालाब बना दिया है। बिना किसी ट्रीटमेंट प्लांट के फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला और बदबूदार पानी खुलेआम नालों में बहाया जा रहा है, जो अब क्षेत्र के महत्वपूर्ण जमोनिया डेम तक पहुंच गया है।
हैरानी की बात यह है कि सीहोर जिला प्रशासन इंदौर के भागीरथपुरा की उस भयावह घटना से कोई सबक लेता नहीं दिख रहा, जहां दूषित पानी के कारण 29 लोगों की जान चली गई थी। पचामा में पनीर फैक्ट्री का यह सफेद गंदा पानी न केवल बदबू फैला रहा है, बल्कि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को भी नष्ट कर रहा है। किसानों का कहना है कि यह पानी खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर रहा है और भूजल को भी जहरीला बना रहा है।
नियमों की सरेआम धज्जियां
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के अनुसार पनीर उद्योग ऑरेंज कैटेगरी में आता है। ऐसी इकाइयों के लिए एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। बिना पानी को साफ किए उसे बाहर नहीं बहाया जा सकता। पनीर फाडऩे के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायनों और दूध के अवशेषों के कारण इस पानी में ऑर्गेनिक लोड बहुत ज्यादा होता है, जो जल स्रोतों में मिलकर उन्हें पीने लायक नहीं छोड़ता। बावजूद इसके पचामा में यह कारोबार बिना रोक टोक चल रहा है।
जमोनिया डेम पर मंडराया संकट
फैक्ट्री का यह जहरीला बहाव नालों से होता हुआ सीधे जमोनिया डेम में मिल रहा है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो डेम का पानी जहरीला हो सकता है, जिससे न केवल मवेशियों बल्कि इंसानी आबादी पर भी बड़ा खतरा मंडरा सकता है।
अधिकारियों का वही रटा-रटाया जवाब
इस गंभीर मामले में जब जिला उद्योग महाप्रबंधक अनुराग वर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने सामान्य प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि मामला जानकारी में आया है और फैक्ट्री प्रबंधक को नोटिस जारी किया जाएगा। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन केवल नोटिस तक सीमित रहेगा या किसी बड़ी अनहोनी के होने से पहले सख्त कार्रवाई करेगा।