
सीहोर। नगर पालिका सीहोर की पूर्व अध्यक्ष अमीता जसपाल सिंह अरोरा के खिलाफ राजनीतिक द्वेष और गलत तथ्यों के आधार पर रची गई शिकायतों का पटाक्षेप हो गया है। शासन द्वारा की गई विस्तृत जांच में उन पर लगे पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के सभी आरोप पूरी तरह झूठे और निराधार पाए गए हैं। मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने अब उन्हें क्लीनचिट देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है, जिसे अरोरा समर्थकों ने सत्य की जीत बताया है।
बता दें कि अमीता जसपाल अरोरा 18 जनवरी 2016 से 17 जनवरी 2021 तक सीहोर नगर पालिका की अध्यक्ष रही थीं। इस दौरान उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी भूमि पर अवैध कॉलोनी निर्माण कर भूखंडों का विक्रय किया है। इन शिकायतों के आधार पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने जांच शुरू की थी और विभाग द्वारा 11 फरवरी 2022 को उन्हें कारण बताओ नोटिस व आरोप पत्र जारी किया गया था।
सुनवाई में दूध का दूध और पानी का पानी हुआ
विभागीय सुनवाई के दौरान पूर्व नपा अध्यक्ष की ओर से सभी ठोस दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए गए। गहन जांच के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि अमीता अरोरा पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद थे। परिणाम स्वरूप 3 फरवरी 2026 को नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने आदेश जारी कर वर्ष 2022 में जारी किए गए आरोप पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
अधिकारी दोषी, अध्यक्ष बेकसूर
शासन के आदेश ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक स्तर पर जो भी कमियां या खामियां पाई गई थींए उनके लिए उस समय के नगर पालिका अधिकारी उत्तरदायी थे, न कि अध्यक्ष। इस फैसले के बाद सीहोर में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त किया है। समर्थकों का कहना है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं। यह आदेश उन लोगों के लिए करारा जवाब है जिन्होंने राजनीतिक द्वेष के चलते उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया था।