महिला सशक्तिकरण बना मजाक, पतियों की मौजूदगी में संपन्न हुई जिपं. की सामान्य सभा की बैठक

सीहोर। सरकार एक ओर महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे कर रही है और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की बात कह रही है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। शुक्रवार को जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में इसका नजारा साफ देखने को मिला, जहां महिला जनप्रतिनिधियों के साथ उनके पति भी न केवल मौजूद रहे, बल्कि बैठक की कार्यवाही में भी सक्रय दिखे। इसे देखकर यही चर्चा रही कि क्या वास्तव में सत्ता की चाबी महिलाओं के हाथ में है या वे केवल नाम की ही जनप्रतिनिधि हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष रचना सुरेंद्र मेवाड़ा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कृषि, सडक़, बिजली और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की समीक्षा की गई। बैठक में जिला पंचायत सीईओ सर्जना यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनप्रतिनिधियों के सुझावों को गंभीरता से लें। लेकिन बैठक के दौरान महिला सदस्यों के साथ आए उनके पतियों की मौजूदगी ने ‘महिला सशक्तिकरण’ के नारों पर सवालिया निशान लगा दिए।

बैठक में इन विभागों की समीक्षा
कृषि विभाग: जिले में रबी सीजन 2025-26 में अब तक 1 लाख 68 हजार मीट्रिक टन उर्वरक बांटा गया है। मृदा परीक्षण के लिए 17 हजार से ज्यादा नमूनों का संग्रह हुआ है।
सडक़ निर्माण: प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत इछावर और सीहोर ब्लॉक में 106 किलोमीटर नई सडक़ों के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है।
सामाजिक न्याय: जिले के 1 लाख 11 हजार से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न पेंशन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। दिसंबर 2025 तक करीब 669 करोड़ रुपये की राशि बांटी गई है।
शिक्षा: जिला शिक्षा के मामले में प्रदेश में अग्रणी रहा है। साल 2024-25 में 10वीं और 12वीं की रैंकिंग में सीहोर जिला प्रदेश में सातवें स्थान पर रहा।
जनता के मुद्दों पर समन्वय की जरूरत
बैठक में उपस्थित उपाध्यक्ष जीवन सिंह मंडलोई और अन्य सदस्यों ने स्थानीय समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया। जिला पंचायत सीईओ ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को ब्लॉक और ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम करना होगा। बैठक में (अध्यक्ष पति सुरेंद्र मेवाड़ा), जनपद अध्यक्षों और विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी मौजूद थे।
जब पति ही परमेश्वर तो…
सीहोर की राजनीति में यह कोई नया मामला नहीं है, लेकिन जिला स्तर की सामान्य सभा जैसी महत्वपूर्ण बैठक में पतियों की एंट्री ने प्रशासन की सख्ती पर भी सवाल खड़े किए हैं। जब जिला पंचायत जैसे उच्च सदन में ही महिला आरक्षण को उनके पतियों द्वारा ‘हाईजैक’ कर लिया जाए तो गांव की पंचायतों में क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

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