फरवरी में सजेगा लेखकों का कुंभ, शिवना सम्मानों की घोषणा, ‘जब से आंख खुली है’ के लिए मंडलोई का बड़ा मान

सीहोर। नए साल के स्वागत के साथ ही सीहोर साहित्यकारों के महाकुंभ की तैयारी में जुट गया है। शिवना प्रकाशन ने वर्ष 2025 के अपने वार्षिक पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है, जिसकी परिणति फरवरी के अंत में एक भव्य साहित्य समागम के रूप में होगी। दिग्गज लेखकों की मौजूदगी में हुई इन घोषणाओं ने न केवल अनुभवी रचनाकारों को सम्मान दिया है, बल्कि साझा कृति सम्मान के जरिए समकालीन लेखन को भी नई ऊर्जा प्रदान की है।
इस वर्ष का सबसे प्रतिष्ठित ‘अंतर्राष्ट्रीय शिवना सम्मान’ जाने-माने वरिष्ठ कवि और लेखक लीलाधर मंडलोई को देने का निर्णय लिया गया है। उन्हें यह सम्मान उनकी बहुचर्चित आत्मकथा ‘जब से आंख खुली है’ के लिए दिया जा रहा है। अपनी विशिष्ट लेखन शैली और जीवन के गहरे अनुभवों को समेटे यह कृति इन दिनों साहित्य जगत में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
साझा रूप से दिया जाएगा कृति सम्मान
संस्थान ने वर्ष 2025 के शिवना कृति सम्मान के लिए दो प्रतिभाओं का चयन किया है। यह सम्मान साझा रूप से मुकेश नेमा को उनकी रचना इत्तू सी इरा और स्मृति आदित्य को उनकी कृति अब मैं बोलूंगी के लिए प्रदान किया जाएगा। दोनों ही लेखकों ने अपनी लेखनी से समकालीन साहित्य में अपनी विशेष पहचान दर्ज की है।
साहित्यिक हस्तियों ने दी बधाई
पुरस्कारों की घोषणा के अवसर पर देश की ख्यातनाम साहित्यिक हस्तियां मौजूद रहीं जिनमें सुधा ओम ढींगरा, मनीषा कुलश्रेष्ठ, यतीन्द्र मिश्र, पंकज सुबीर और आकाश माथुर शामिल थे। सभी ने चयनित रचनाकारों को बधाई देते हुए इसे हिंदी साहित्य की समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
28 फरवरी को सजेगा साहित्य समागम
शिवना प्रकाशन के प्रबंधक शहरयार खान और पंखुरी पुरोहित ने बताया कि इन सभी सम्मानित लेखकों को आगामी 28 फरवरी और 1 मार्च को आयोजित होने वाले शिवना साहित्य समागम में सम्मानित किया जाएगा। इस दो दिवसीय भव्य समारोह में वर्ष 2025 के विजेताओं के साथ-साथ वर्ष 2024 के सम्मानित लेखकों और नव-लेखन के क्षेत्र में उभरते रचनाकारों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।



