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आष्टा मंडी: ए ग्रेड का दर्जा प्राप्त, सी क्लास से भी बदत्तर सुविधाएं

जगह-जगह पड़ी हैं शराब की बोतलें, बेतहाशा धूल, अतिक्रमण भी हो गया जमकर

आष्टा। सीहोर जिले की आष्टा अनाज मंडी को कहने को तो ए ग्रेड का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यहां की व्यवस्थाएं एवं सुविधाएं सी क्लास से भी बदत्तर हैं। मंडी परिसर में कई स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है तो वहीं चारों तरफ धूल के गुब्बार उड़ रहे हैं। मंडी को असामाजिक तत्वों ने शराब का अड्डा भी बना रखा है। जगह-जगह शराब की बोेतलें पड़ी हुई हैं। इतना ही नहीं मंडी के चारों तरफ जमकर अतिक्रमण भी किया जा रहा है। इस तरफ न तोे मंडी प्रशासन का ध्यान है न ही स्थानीय प्रशासन इस दिशा में कोई कारगर कदम उठा रहा है।
सीहोर जिले की आष्टा मंडी सबसे बड़ी मंडियों मेें शुमार हैं। यहां पर वर्षभर किसान अपनी फसलें लेकर आते हैं। आष्टा मंडी में न सिर्फ सीहोर जिले, बल्कि आसपास के जिलों के किसान भी अपनी फसलें लेकर पहुंचतेे हैं। आष्टा मंडी को यूं तो ए क्लास का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यहां की स्थिति सी क्लास से भी बदत्तर है। यहां पर आने वाले किसानों को कई परेशानियोें का सामना करना पड़ता है। दूर-दूर से आनेे वाले किसानों के लिए मंडी परिसर में कृषक विश्राम भवन बनाया गया है, लेकिन इसमें धूल का अंबार लगा हुआ है। जगह-जगह शराब की बोतलें पड़ी हुईं हैं। प्रवेश द्वार से भीतर जाते ही शौचालय की बदबू भी आती है।
अतिक्रमण की चपेट में मंडी-
आष्टा मंडी चारों तरफ से अतिक्रमण की चपेट में भी है। बेशकीमती जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। पहले मंडी परिसर में बांस व त्रिपाल लगाकर अतिक्रमण किया जाता था, लेकिन अब तो बाकायदा पक्का निर्माण कर ऊपर से त्रिपाल ढकने का चलन शुरू हो गया है। यह अतिक्रमण इतना विस्तृत हो चुका है कि मंडी परिसर की नालियां तक दिखाई देना बंद हो गई है। इस वजह से हर सीजन में मंडी सहित शहर का मुख्य मार्ग कन्नौद रोड पर कई-कई घंटों यातायात बाधित हो जाता है, जिससे शहरवासियों को भी कठिनाई झेलना पड़ती है। आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप लेने वाली है, क्योंकि मंडी के पीछे जो भूमि सीजन के समय किसानों के ट्रेक्टर खड़ी करने में उपयोग में ली जाती थीं वहां पर कॉलोनी कट चुकी है। इससे जगह कम हो जाने पर समस्या का सामना करना पड़ेगा।
गड़बड़ी भी हो रही है जमकर-
आष्टा मंडी न सिर्फ अव्यवस्थाओं के कारण चर्चाओं में है, बल्कि यहां पर किसानों के साथ जमकर गड़बड़ियां भी की जाती हैं। पिछले दिनों किसान ने व्यापारी द्वारा तोल में हुई गड़बड़ी को लेकर जमकर हंगामा किया था। इसके बाद व्यपारी का पंचनामा भी बनाया गया था एवं तुलावटी पर कार्यवाही की गई थी। तुलावटी पर कार्यवाही के विरोध में तुलावटी संघ अध्यक्ष का कहना है कि 200 से अधिक व्यापारियों पर मात्र 62 तुलावटी ही हैं। आवक के समय एक तुलावटी द्वारा एक ही समय पर दो या तीन जगह आवक तोलना असंभव है। जहां तोल काटों में गड़बड़ी का सवाल है तो व्यापारियों द्वारा लगाए गए प्रायवेट काटों पर तुलावटी का कोई नियंत्रण नहीं होता। मंडी प्रशासन द्वारा आवंटित सरकारी कांटे यदि हमें उपलब्ध करा दिए जाएं तो हम उनके तोल की पूरी जवाबदारी लेंगे। उन काटों में गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।

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