Newsआष्टाइछावरजावरनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशराजनीतिकरेहटीसीहोर

अमर शहीद कुंवर चैन सिंह के शहादत दिवस पर दिया गया गाड आफ आनर

- विधानसभा अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों ने अर्पित किए श्रद्धा सुमन

सीहोर। अमर शहीद कुंवर चैन सिंह के शहादत दिवस पर शासन की ओर से गाड आफ आनर दिया गया। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने अमर शहीद कुंवर चैनसिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अमर शहीद कुंवर चैन सिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मुझे आज उस पावन धरती पर आने का सौभाग्य मिला है, जिस भूमि पर आजादी के लिए एक प्रकार से पहली सशस्त्र क्रांति की शुरूआत हुई। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में सबसे पहले देश है। देश होगा, तभी हम सभी होंगे। बिना देश के हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि अमर शहीद कुंवर चैनसिंह की शहादत इस बात की प्रेरणा देती है कि कुंवर चैनसिंह के मन में थोड़ा भी लालच होता तो उनकी शहादत नहीं होती और राजशाही जीवन व्यतीत कर सकते थे, लेकिन उन्होंने देश को सबसे ऊपर रखा और भारत को आजाद करने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में पद, प्रतिष्ठा, धन, दौलत की पूजा नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के गुणों की पूजा होती है। व्यक्ति के गुणों के कारण ही उन्हें सदैव याद रखा जाता है। उन्होंने कहा कि आज यहां इतनी बड़ी संख्या में नागरिक कुंवर चैन सिंह को श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं, तो वह केवल उनके देश के प्रति समर्पण और बलिदान के कारण। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, अशफाक उल्ला खान, रामप्रसाद बिस्मिल, बलवंत राव फड़के, दुर्गा देवी सहित अनेक देशभक्तों और क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया पर इन बलिदानियों को मजहब के आधार पर कोई नहीं जानता, बल्कि देश के लिए किए गए बलिदान के लिए इन्हें पूरा देश नमन करता है। उन्होंने कहा कि अमर शहीदों की स्मृति में आयोजित किए जाने वाले इस तरह के कार्यक्रम निश्चित ही समाज को प्रेरणा देते हैं। विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने नगर पालिका द्वारा कम्युनिटी हॉल का नाम कुंवर चैनसिंह के नाम पर रखे जाने तथा उनकी गौरव गाथा को प्रदर्शनी के रूप में प्रस्तुत करने के लिए नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर तथा इस आयोजन के लिए बलवीर सिंह तोमर की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रम केवल जयंती या शहादत दिवस के अवसर पर ही नहीं होना चाहिए, बल्कि साल में कई बार ऐसे आयोजन होते रहना चाहिए, ताकि नागरिकों को इनसे प्रेरणा मिले और आने वाली पीढियां इन बलिदानियों के बारे में जान सके। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को केंद्र में रखकर भी आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि उन्हें देश की आजादी के लिए दी गई कुर्बानियों के बारे में पता चले और उनसे प्रेरणा लेकर वह एक अच्छे नागरिक और देशभक्त बन सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि कुंवर चैनसिंह और उनके साथी हिम्मत खां, बहादुर खां के नाम पर बच्चों की प्रतियोगिता आयोजित की जानी चाहिए तथा उसमें बच्चों को सम्मानित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व विधायक एवं अमर शहीद कुंवर चैन सिंह के वंशज राजर्वधन सिंह, जिला भाजपा अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजीव गुजराती, हिम्म्त खां बहादुर खां के वंशज जेडएके लोधी तथा भारत जोड़ो समिति के बलवीर सिंह तोमर ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए और संबोधित किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य सिलाई बोर्ड के अध्यक्ष मनोहरलाल माहेश्वरी, कलेक्टर बालागुरु के., एसपी दीपक कुमार शुक्ला, सन्नी महाजन, पंकज शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
शहीद कुंवर चैन सिंह को शिक्षा पाठ्यक्रम में जोड़ने का आह्वान, सौंपा पत्र
मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर शहीद कुंवर चैन सिंह की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीहोर पहुंचे। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर ने उन्हें एक पत्र भी सौंपा, जिसमें मांग की है कि स्वतंत्रता संग्राम में सीहोर के संदर्भ में शहीद कुंवर चैन सिंह का गौरवशाली इतिहास रहा है। इसको मध्यप्रदेश के शिक्षा पाठ्यक्रम में जोड़ा जाता है तो आने वाली पीढ़ी को उनके गौरवशाली इतिहास से परिचित होने का अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने शहीद कुंवर चैन सिंह के इतिहास को मध्यप्रदेश के शिक्षा पाठ्यक्रम में जोड़ने की अपील की है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Gli amici spesso consigliano di aprire un blog, ma i loro suggerimenti non funzionano sempre: obiettivi, pubblico e strumenti richiedono valutazioni precise. Per evitare errori, conviene esaminare meglio il tema. In autunno, ecco cosa accade al fegato chiudi il coperchio: i germi volano Tra scrivere ogni giorno e pubblicare solo quando nasce un'idea forte, ho sempre preferito il secondo metodo: un blog personale cresce meglio con una voce riconoscibile, anche se gli aggiornamenti arrivano meno spesso.