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ट्राइडेंट ग्रुप ने बगवाड़ा के आरोग्य केंद्र में लगाया निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर

स्वस्थ लोग, समृद्ध समाज की ओर बढ़ते कदम

बुधनी। ट्राइडेंट ग्रुप की सीएसआर इकाई द्वारा बुधनी तहसील के ग्राम बगवाड़ा में एक दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 130 लाभार्थी ने स्वास्थ्य जांच और परामर्श की सेवाओं का लाभ उठाया। इस दौरान बीपी, शुगर और हीमोग्लोबिन (HB) की जांच के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी प्रदान किया गया। गंभीर मामलों के लिए रेफरल और मोबाइल एम्बुलेंस सेवाएं भी उपलब्ध रहीं।
ट्राइडेंट ग्रुप की सीएसआर इकाई ट्राइडेंट ह्यूमैनिटी फाउंडेशन के अंतर्गत “हेल्थ ऑन व्हील” मोबाइल एम्बुलेंस परियोजना की शुरुआत मधुबन अस्पताल के सहयोग से की गई। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को सहज, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ट्राइडेंट ग्रुप के चेयरमैन पद्मश्री राजिंदर गुप्ता एवं सीएसआर प्रमुख मधु गुप्ता के मार्गदर्शन में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर सीएसआर टीम से अरविंद गिरी, सुबेश तिवारी, और मधुबन अस्पताल के सानिध्य में डॉ.दीपिका राजपूत, पैरामेडिकल स्टाफ, आईटीआई प्रधानाचार्य, अध्यापक और वालंटियर, सीएचओ, ए.न.म, आशा कार्यकर्ता, सरपंच, सचिव तथा अन्य लोगों की उपस्थिति रही।
शिविर में दी गई प्रमुख सेवाएं –
वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श, बीपी, शुगर और हीमोग्लोबिन जांच, आवश्यक दवाओं का निःशुल्क वितरण, गंभीर रोगियों के लिए रेफरल और एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध रही। इस पहल का उद्देश्य केवल इलाज नहीं, बल्कि सभी में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाना है, ताकि “स्वस्थ गांव, समृद्ध समाज” की सोच को धरातल पर उतारा जा सके। ट्राइडेंट ह्यूमैनिटी फाउंडेशन ग्रामीण भारत के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी ऐसे शिविरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को घर-घर पहुंचाने को संकल्पित है।

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Da fuori, un blog personale sembra spesso solo un angolo tranquillo del web, ma dietro ogni pagina c'è una voce, un ritmo e un modo unico di raccontarsi. Vale la pena approfondire come nasce davvero uno spazio così. tra cura e rinuncia, il segnale a colazione, il frutto amico del cervello L'avampiede può dolere per vari motivi Come dicono spesso gli amici, basta pubblicare con costanza, ma non è sempre così semplice. Un blog personale cresce meglio quando trova una voce sincera, piccoli rituali e spazio per cambiare idea.