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शिक्षा ही बदलाव की असली बुनियाद, नशे से दूर रहकर गढ़े सशक्त भारत: राज्यपाल मंगुभाई पटेल

सीहोर। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि शिक्षा ही समाज और देश में बदलाव की सबसे सशक्त बुनियाद है। शिक्षित बच्चे ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि बालक हो या बालिका, हर बच्चे को शिक्षा के समान अवसर मिलने चाहिए। राज्यपाल मंगलवार को भैरूंदा तहसील के ग्राम मोगराखेड़ा में आयोजित जनजातीय विकास सशक्तिकरण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम में राज्यपाल का स्वागत जनजातीय रीति रिवाजों और लोक परंपराओं के साथ आत्मीय ढंग से किया गया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसकी राज्यपाल ने सराहना की। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको के मंत्र को दोहराते हुए जनजातीय युवाओं को निरंतर आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया।
नशे और सिकल सेल के खिलाफ किया जागरूक
राज्यपाल ने नशे को समाज के लिए घातक बताते हुए इसे त्यागने की अपील की। वहीं जनजातीय समुदाय में होने वाली सिकल सेल बीमारी पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक इसे जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने सलाह दी कि आने वाली पीढिय़ों को सुरक्षित रखने के लिए विवाह से पूर्व सिकल सेल की जांच अनिवार्य रूप से करानी चाहिए।
भगवान बिरसा मुंडा के सपनों का भारत
भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान को याद करते हुए राज्यपाल ने बताया कि जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़ और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं को जनजातीय क्षेत्रों तक प्राथमिकता से पहुंचा रही है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल, मोगराखेड़ा पंचायत
सम्मेलन के बाद राज्यपाल ने नवनिर्मित पंचायत भवन का अवलोकन किया। जब उन्हें यह पता चला कि मोगराखेड़ा पंचायत में सरपंच सहित सभी पंच महिलाएं हैं और वे निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं तो उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने महिला पंचों के साथ बैठक कर गांव के विकास कार्यों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर राज्य जनजातीय वित्त विकास निगम की अध्यक्ष निर्मला बारेला, जनपद अध्यक्ष मंजू अवध पटेल, कलेक्टर बालागुरु के., एसपी दीपक कुमार शुक्ला, जिला पंचायत सीईओ सर्जना यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

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Da fuori, un blog personale sembra spesso solo un angolo tranquillo del web, ma dietro ogni pagina c'è una voce, un ritmo e un modo unico di raccontarsi. Vale la pena approfondire come nasce davvero uno spazio così. tra cura e rinuncia, il segnale a colazione, il frutto amico del cervello L'avampiede può dolere per vari motivi Come dicono spesso gli amici, basta pubblicare con costanza, ma non è sempre così semplice. Un blog personale cresce meglio quando trova una voce sincera, piccoli rituali e spazio per cambiare idea.