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ईरान-इजराइल युद्ध ने सीहोर को लौटा केरोसिन युग…

सीहोर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और इजराइल के बीच छिड़े युद्ध का सीधा असर अब सीहोर जिले की रसोइयों पर दिखने लगा है। पिछले 24 दिनों से जिले में रसोई गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत बनी हुई है, जिससे आम जनता की मुसीबतें चरम पर हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने जिले के लिए विशेष तौर पर केरोसिन मिट्टी का तेल आवंटित किया है। लंबे समय बाद जिले में एक बार फिर केरोसिन युग लौट आया है।
गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए पीडीएस केरोसिन का वन टाइम आवंटन जारी किया है। इसके तहत सीहोर जिले के नगरीय क्षेत्रों के लिए 12000 लीटर केरोसिन आवंटित किया गया है। खाद्य विभाग के अनुसार यह तेल मुख्य रूप से खाना पकाने और रोशनी दीप प्रज्वलन के उद्देश्य से दिया गया है। जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि 5 अप्रैल तक ऑयल डिपो से केरोसिन का उठाव हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
प्रति परिवार मिलेगा 3 लीटर तेल
खाद्य विभाग ने वितरण की रूपरेखा तैयार कर ली है। कलेक्टर द्वारा निर्धारित दरों पर पात्र परिवारों को अधिकतम 3 लीटर प्रति परिवार के मान से केरोसिन दिया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह वितरण पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगा। लंबे समय बाद शुरू हुई केरोसिन की सप्लाई ने लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है, जब राशन की दुकानों पर लंबी कतारें लगा करती थीं।
गैस एजेंसियों पर मची अफरा-तफरी
जिला मुख्यालय पर संचालित तीनों प्रमुख गैस एजेंसियों पर पिछले तीन सप्ताह से तनावपूर्ण माहौल है। सूरज निकलने से पहले ही लोग खाली सिलेंडर लेकर कतारों में लग जाते हैं। 24 दिन बीत जाने के बाद भी आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई है, जिससे उपभोक्ताओं में डर का माहौल है। लोगों को अंदेशा है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो आने वाले दिनों में चूल्हा जलाना और भी मुश्किल हो जाएगा। पैनिक बुकिंग की वजह से वेटिंग लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है।
काम-धंधा छोडक़र गैस की तलाश
गैस की किल्लत का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ा है, जो अपना काम छोडक़र दिन भर गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों की हालत और भी खराब है, जिन्हें घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

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