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44 डिग्री की भीषण गर्मी में खाली बर्तन और गुलाब लेकर भोपाल पहुंचीं सीहोर की महिलाएं, जल संकट को लेकर दिखाई गांधीगिरी

सीहोर। जिले के ग्रामीण इलाकों में गहराते जल संकट से परेशान महिलाओं का सब्र टूट गया। भीषण गर्मी और 44 डिग्री के तपते तापमान की परवाह किए बिना करीब 200 ग्रामीण महिलाएं और पुरुष सीहोर से पैदल मार्च करते हुए राजधानी भोपाल पहुंच गए। पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीणों ने सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अनोखा गांधीगिरी अंदाज अपनाया। प्रदर्शनकारी महिलाएं अपने हाथों में पानी के खाली बर्तन, बैनर और अधिकारियों को देने के लिए गुलाब के फूल लेकर सडक़ों पर उतरीं।
ग्राम पंचायत रामगढ़ के सरपंच प्रतिनिधि अशोक मीणा और किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के संयुक्त नेतृत्व में यह विशाल रैली निकाली गई। इस जन-आंदोलन में जिले के पांगरी जंगल, रामगढ़ आलमपुरा, अमरोद और जमिनी सहित आधा दर्जन से अधिक जल संकट प्रभावित गांवों के त्रस्त लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि उनके क्षेत्रों में तत्काल नए नलकूप का खनन कराया जाए और ठप पड़ी नल-जल योजना को जल्द से जल्द चालू कर हर घर तक पानी पहुंचाया जाए।
भदभदा पर पुलिस ने की बैरिकेडिंग, लगा लंबा जाम
जैसे ही आंदोलनकारियों की रैली भोपाल के भदभदा क्षेत्र में पहुंची, वहां पहले से मुस्तैद भारी पुलिस बल और महिला पुलिस अधिकारियों ने बैरिकेडिंग कर ग्रामीणों को आगे बढऩे से रोक दिया। पुलिस द्वारा रोके जाने पर ग्रामीण वहीं सडक़ पर बैठ गए, जिससे भदभदा मार्ग पर काफी समय तक लंबा चक्काजाम लग गया और वाहनों की कतारें लग गईं। हालांकि ग्रामीणों ने पूरी शांति के साथ अपनी बात प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रखी।
वित्त विभाग द्वारा पीएचई बजट में कटौती का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के बजट में भारी कटौती की गई है। इस बजट कटौती की वजह से ही ग्रामीण क्षेत्रों में नए बोरिंग का काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है और अधिकारी फंड न होने का रोना रो रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि पीएचई विभाग का बजट तुरंत बढ़ाया जाए ताकि गर्मी में तड़प रहे लोगों को पानी मिल सके।
मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
सडक़ पर हुए इस तीखे प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनके गांवों में पानी की समस्या का जल्द और स्थाई समाधान नहीं किया गयाए तो यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। आने वाले दिनों में सीहोर की जनता भोपाल में और बड़ा तथा उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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