खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था से नाराज किसान, फार्मर आईडी के फेर में उलझी बोवनी, सिर्फ 10 प्रतिशत के ही बने कार्ड
सर्वर डाउन और कतारों से परेशान किसान बोले- बिना तैयारी थोपी गई नई व्यवस्था, योजना में बदलाव की मांग

सीहोर। खरीफ सीजन की शुरुआत और बोवनी का समय नजदीक आते ही जिले के किसानों के सामने खाद संकट खड़ा होने लगा है। इस बार शासन द्वारा खाद वितरण व्यवस्था में किए गए बड़े बदलाव के तहत पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर फार्मर आईडी (किसान कार्ड) से जोड़ दिया गया है। नई ई-टोकन खाद वितरण प्रणाली के अनुसार अब किसान सीधे सोसायटियों या दुकानों से खाद नहीं खरीद सकेंगे, बल्कि उन्हें पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी। इस नई व्यवस्था का जिले भर के किसान कड़ा विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि बिना किसी पूर्व तैयारी के उन पर यह जटिल ऑनलाइन सिस्टम थोप दिया गया है, जिससे इस बार बोवनी पिछडऩे की चिंता सताने लगी है।
1.45 लाख में से सिर्फ 13 हजार किसानों के पास आईडी
ई-टोकन व्यवस्था तो लागू कर दी गई है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिले के अधिकांश किसानों के पास फार्मर आईडी ही नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि सीहोर जिले के करीब 1 लाख 45 हजार किसानों में से अब तक मात्र 13,445 किसान ही अपनी फार्मर आईडी बनवा पाए हैं, जो कुल संख्या का महज 10 फीसदी है। किसान आईडी बनवाने में रुचि इसलिए भी नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि कई किसान ऐसे हैं जो दूसरों की जमीन किराए या मुनाफे (बटाई) पर लेकर खेती करते हैं, जबकि मूल भूमि स्वामियों ने अब तक आईडी नहीं बनवाई है।
केवाईसी और खसरे से लिंक नहीं है आधार
नाराज किसानों का कहना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था में कई तकनीकी खामियां हैं। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के खसरे से आधार कार्ड लिंक नहीं हैं और न ही खातों की बैंक केवाईसी पूरी है। किसानों की मांग है कि सरकार को पहले सभी किसानों की आईडी खुद बनाकर देनी चाहिए थी, उसके बाद इस योजना को अनिवार्य करना था। अचानक लिए गए इस फैसले से किसानों की खाद अटक गई है।
सर्वर डाउन होने से एक्सपायर हो रहा टोकन का समय
डिजिटल सिस्टम की सबसे बड़ी मार किसानों पर सर्वर डाउन होने के रूप में पड़ रही है। वेबसाइट नहीं चलने के कारण किसानों की खाद बुक नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जैसे-तैसे ऑनलाइन पर्ची (ई.टोकन) जनरेट हो भी जाती है तो सोसाइटी पहुंचने पर खाद उपलब्ध नहीं होती। इस व्यवस्था में खाद उठाने की एक निश्चित तारीख दी जाती है और यदि उस अवधि में खाद नहीं मिली तो पर्ची की समय-सीमा हो जाती है, जिससे किसान दोबारा परेशान होने को मजबूर है।
कालाबाजारी रोकने लगाए जा रहे शिविर
इस पूरे मामले में कृषि विभाग के उपसंचालक अशोक उपाध्याय का कहना है कि इस नई व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगेगी। इसके लागू होने से किसान घर बैठे ही अपनी खाद बुक कर सकेंगे और उन्हें सोसायटियों के बाहर लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। जिन किसानों की आईडी नहीं बनी हैए उनके लिए गांवों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां जाकर किसान अपना पंजीयन आसानी से करवा सकते हैं।



