सनातन सबकी रक्षा करता है, धर्म हटते ही हो जाता है भीषण युद्ध: पं. रविशंकर तिवारी

सीहोर। जहां पर धर्म होता है, वहां कभी युद्ध नहीं होता। धर्म के हटते ही विनाश और युद्ध शुरू हो जाता है, इसलिए जीवन में धन से कहीं अधिक महत्व धर्म का है। बचपन में सुनी गई भगवान की कथा और सत्संगए जीवन के अंतिम पड़ाव में काम आते हैं। भगवान की भक्ति सरलता से नहीं बल्कि निरंतर अभ्यास से मिलती है।
यह प्रेरक विचार भागवत भूषण पंडित रविशंकर तिवारी ने कस्बा स्थित हिंगलाज माता मंदिर में व्यक्त किए। यहां भावसार समाज महिला मंडल द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
मन रूपी बकरे को मारना जरूरी
कथा व्यास पंडित तिवारी ने इंसान के चंचल मन की तुलना बकरे से करते हुए कहा कि जब तक आप इस मन रूपी बकरे को काबू में नहीं करेंगे, तब तक आपका मन प्रभु की भक्ति में नहीं लगेगा। संत जन अपनी युक्ति और ज्ञान से इसी मन को मारने का काम करते हैं। यही कारण है कि सच्चे संतों के आगे बड़े बड़े राजा-महाराजा भी अपना शीश झुकाते हैं।
पद का अभिमान विनाश का कारण
मान-अपमान के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को कभी भी बिना निमंत्रण के किसी के घर या आयोजन में नहीं जाना चाहिए। माता सती अपने पिता राजा दक्ष के महायज्ञ में बिना बुलाए चली गई थीं, जहां अपमानित होने के कारण उन्हें यज्ञ की अग्नि में खुद को भस्म करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि व्यक्ति को कभी भी अपने पद का घमंड और दूसरों का अपमान नहीं करना चाहिए। राजा दक्ष ने प्रजापति होने के अहंकार में भगवान शिव का अपमान किया थाए जिसे महादेव ने पल भर में तोड़ दिया।
जहां से धर्म हटा, वहां सर्वनाश हुआ
पंडित श्री तिवारी ने महाभारत और रामायण के उदाहरण देते हुए समझाया दुर्योधन के परिवार से जैसे ही धर्म के प्रतीक महात्मा विदुर अलग हुए, भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत का युद्ध रच दिया। लंका में रावण के परिवार से जैसे ही धर्म का साथ देने वाले विभीषण हटे, भगवान श्रीराम ने रावण के साम्राज्य का सर्वनाश कर दिया। धर्म हर परिस्थिति में सबकी रक्षा करता है, लेकिन जैसे ही जीवन से धर्म हटता है, सब कुछ नष्ट हो जाता है।
वराह और नरसिंह अवतार की कथा सुनाई
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि जब महाबली असुर पृथ्वी को चुराकर रसातल में ले गया था, तब ब्रह्मा जी के आदेश पर मनु महाराज पृथ्वी को ढूंढने निकले। तब भगवान ने वराह अवतार लेकर उस असुर का वध किया और पृथ्वी की रक्षा की। इसके बाद पृथ्वी पर अत्याचार करने वाले हिरण्यकश्यप का संहार करने और परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान को नरसिंह अवतार लेना पड़ा था। उन्होंने बताया कि सनत कुमारों का अपमान करने के कारण ही भगवान नारायण के द्वारपाल जय और विजय को श्राप मिला था, इसलिए कभी भी संतों और ब्राह्मणों का अपमान नहीं करना चाहिए।
शिव-पार्वती विवाह पर झूम उठे श्रद्धालु
कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग बेहद धूमधाम से सुनाया गया। पंडित जी ने बताया कि भोलेनाथ को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने हजारों वर्षों तक घोर तपस्या की थी। उनकी बारात में देवता और असुर दोनों शामिल हुए थे। कथा पंडाल में शिव-पार्वती बने कलाकारों की भव्य वरमाला कराई गई। इस दौरान भगवान शिव और श्रीकृष्ण के मधुर भजनों पर श्रद्धालु महिलाएं और भक्तगण भावविभोर होकर जमकर नाचे।
बता दें कि हिंगलाज माता मंदिर में चल रही यह संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से 11 बजे तक आयोजित की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी जनता पहुंच रही है।



