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सलकनपुर धाम पर शाम के समय कम हुई श्रद्धालुओं की संख्या

सीहोर। आस्था के केंद्र सलकनपुर देवीधाम में इन दिनों भक्ति के साथ-साथ गहरी दहशत का माहौल है। दो दिन पहले एक मादा तेंदुआ अपने दो नन्हे शावकों के साथ बेफिक्र अंदाज में मंदिर की मुख्य सीढिय़ों पर टहलती हुई नजर आई। यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में भारी हडक़ंप मच गया है।
इस घटना का सबसे बड़ा असर श्रद्धालुओं की आवाजाही पर पड़ा है। मंदिर में आने वाले भक्त अब इस कदर डरे हुए हैं कि शाम ढलते ही वे तेजी से सलकनपुर की पहाड़ी से नीचे उतरने लगते हैं। देर रात या तडक़े सुबह सीढिय़ों के रास्ते माता के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं ने फिलहाल डर के कारण अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।

साधु की मौत के बाद भी नहीं जागा विभाग

श्रद्धालुओं में खौफ होने की एक बड़ी वजह करीब डेढ़ महीने पुरानी वह दर्दनाक घटना है, जिसने सबको झकझोर दिया था। बीती 14 मई को सलकनपुर टेकरी के पास नागिन जोड़ पर एक साधु का शव मिला था, जो रोज सुबह 4 से 5 बजे के बीच दंडवत यात्रा करते हुए माता के दर्शन को जाते थे। वन विभाग की जांच और ट्रैप कैमरों से यह साफ हुआ था कि तेंदुए ने ही उन पर हमला किया था। इस घटना के बाद 14 जून को भी एक तेंदुआ सीढिय़ों पर चढ़ा था और अब मादा तेंदुए की शावकों के साथ मौजूदगी ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कागजों में वन विभाग के दावे
साधु की मौत के समय रेहटी वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए थे। क्षेत्र में पिंजरा लगाने और जिला मुख्यालय से अनुमति मांगने की बात कही गई थी, लेकिन डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अब मुख्य सीढिय़ों तक तेंदुए के परिवार के पहुंचने के बाद स्थानीय दुकानदारों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। लोगों का साफ कहना है कि प्रशासन शायद किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
जिले में भारी तादाद में हैं हिंसक वन्य जीव
तेंदुआ: 400
बाघ: 20
सियार: 800
हिरण: 1500
भालू: 300
सांभर: 250
चीतल: 1200
भेडक़ी: 600
गिद्ध: 519
नीलगाय: 150
सुरक्षित रेस्क्यू की मांग, रात के समय बरतें सावधानी
स्थानीय निवासियों, पुजारियों और दुकानदारों ने वन विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द सक्रिय होकर इस तेंदुए के परिवार को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और उन्हें दूर जंगल में छोड़ा जाए, ताकि श्रद्धालु बिना किसी खौफ के माता के दर्शन कर सकें। इधर प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं से शाम के बाद या तडक़े सुबह अकेले पहाड़ी या सीढिय़ों के रास्ते पर जाने से बचने की अपील की है।

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