
सीहोर। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर चंदा चोरी के मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ एफआईआर होने के बाद अब कई मंदिरों सहित सीहोर जिले के प्रसिद्ध सलकनपुर स्थित मां बिजासन धाम में भी चंदा, चढ़ोतरी से होने वाली आय की जांच की मांग भी उठने
लगी है। कांग्रेस के युवा नेता एवं बुधनी विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे विक्रम मस्ताल शर्मा ने वीडियो जारी करते हुए मंदिर समिति पर कई आरोप लगाए। उन्होंने यहां मंदिर में हुई लाखों रुपए की चोरी के खुलासे पर भी कहा कि वह खुलासा अब तक स्पष्ट नहीं है। कितनी चोरी हुई थी, कितनी बरामदगी हुई है सब कुछ अंधेरे में है। उन्होंने मंदिर में आने वाली चढ़ोतरी को लेकर भी मंदिर समिति पर आरोप लगाया है कि मंदिर समिति चंदा एवं चढ़ोतरी के रूप में आने वाली राशि को सार्वजनिक नहीं करती है। विक्रम मस्ताल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चैहान सहित सीहोर जिला प्रशासन एवं कलेक्टर से मांग की है कि सलकनपुर मंदिर में होने वाली आय की भी जांच कराई जाए।
मंदिर समिति के पास है एक-एक रूपए का हिसाब-

इस मामले में मंदिर समिति के अध्यक्ष महेश उपाध्याय का कहना है कि मंदिर समिति की कार्यपद्धति पूरी तरह से नियमों के अनुकूल है। किसी तरह की गड़बड़ी न हो उसका पूरा ध्यान रखा जाता है। माताजी के यहां आने वाली चढ़ोतरी और चंदे की रकम का पूरा हिसाब-किताब रहता है। काउंटिंग हाल बना हुआ है, जहां पर सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं एवं समिति सदस्यों, अध्यक्ष की निगरानी में यहां पर आने वाले चढ़ोतरी और चंदे की काउंटिंग होती है और उसको बाकायदा बैंक में जमा कराया जाता है। कोई भी संदेह प्रकट करता है या कोई आरोप लगाता है यह उनका काम है, लेकिन हमारी पूरी कोशिश होती है कि मंदिर में चंदा और आय के एक-एक रुपए का हिसाब-किताब हम रखें। पूरी ईमानदारी से मंदिर समिति अपना कार्य कर रही है। आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
हर वर्ष होती है करोड़ों की आय-
दरअसल सलकनपुर मंदिर में भी प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए की आय होती है। नवरात्रि के दौरान चंदा, चढ़ोतरी में बड़ी राशि जहां दान के रूप में आती है, वहीं सोना-चांदी के जेवर भी मातारानी पर चढ़ाएं जाते हैं। कई महंगे वस्त्र सहित अन्य सामान भी यहां पर चढ़ाया जाता है, नवरात्रि के दौरान विदेशों में रहने वाले भक्त भी यहां पर ज्यौत प्रकट करवाते हैं बड़ी राशि भी दान के रूप में देते हैं, लेकिन उनका कोई हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं किया जाता है। वर्षों से यहां पर होने वाली आय का मंदिर समिति ने कोई हिसाब सार्वजनिक नहीं किया। वर्ष 2019 में भाजपा सरकार के सत्ता परिवर्तन के बाद मंदिर समिति भंग हुई थी। इसके बाद प्रशासन ने जरूर यहां हुई आय को सार्वजनिक किया था, लेकिन मंदिर समिति आय को सार्वजनिक नहीं कर रही है। अब मंदिर समिति पर भी चंदा, चढ़ोतरी में चोरी के आरोप लगने लगे हैं एवं इसकी जांच की मांग भी उठने लगी है।



