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कृषि मंत्री के गढ़ में फूट किसानों का गुस्सा, ट्रैक्टर मार्च के बाद इंदौर-भोपाल हाईवे पर किया चक्काजाम

मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर अड़े हजारों किसान - कलेक्टर के न आने पर भडक़े, तपती धूप में घंटों फंसे रहे वाहन

सीहोर। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के भैरुंदा क्षेत्र में सोमवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। मूंग की शत प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन अचानक उग्र हो गया। किसान स्वराज संगठन के नेतृत्व में जुटे हजारों किसानों ने पहले क्षेत्र में एक विशाल ट्रैक्टर मार्च निकाला और उसके बाद इंदौर-भोपाल व भैरुंदा-इंदौर हाईवे पर ट्रैक्टर अड़ाकर चक्काजाम कर दिया। इस ाजाम के कारण दोनों प्रमुख मार्गों पर यातायात घंटों पूरी तरह ठप रहा और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आंदोलन के दौरान स्थिति उस समय और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई, जब किसानों से ज्ञापन लेने के लिए जिला कलेक्टर मौके पर नहीं पहुंचे। प्रशासन के अन्य छोटे अधिकारियों को देखकर किसान भडक़ गए और उन्होंने किसी भी अन्य अधिकारी को ज्ञापन सौंपने से साफ इनकार कर दिया। नाराज किसान सिर्फ कलेक्टर को ही ज्ञापन देंगे की जिद पर अड़ गए और हाईवे की जलती सडक़ पर ही धरना देकर बैठ गए। इस दौरान किसानों ने सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
यह हैं किसानों की 3 प्रमुख मांगें
शत प्रतिशत खरीदी: किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि उनकी मूंग की पूरी की पूरी उपज को सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे।
लिमिट खत्म हो: खरीदी प्रक्रिया के दौरान शासन द्वारा तय की गई लिमिट को तुरंत समाप्त किया जाएए ताकि किसान को अपनी बची हुई फसल के लिए भटकना न पड़े।
तकनीकी बाधाएं दूर हों: मूंग खरीदी के सरकारी पोर्टल और रजिस्ट्रेशन में आ रही तकनीकी दिक्कतों को तत्काल सुधारा जाए, जिससे खरीदी बिना किसी रुकावट के हो सके।
भीषण गर्मी में बसें फंसी
घंटों तक हाईवे बंद रहने के कारण इंदौर, भोपाल और सीहोर की ओर आने-जाने वाले वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच सैकड़ों बस यात्री, निजी वाहन चालक और यहां तक कि मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस भी इस जाम में फसी रहीं। यात्रियों को पानी और छांव के लिए परेशान होना पड़ा। हालांकि सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंच गए थे। वे लगातार किसान नेताओं से बातचीत कर रास्ता खुलवाने का प्रयास करते रहे, लेकिन किसान टस से मस नहीं हुए।

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