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सीहोर में ’शिवभक्ति’: कावड़ यात्राओं की धूम, बुधनी में निकली, कुबेरेश्वर धाम में kal

- ग्रामीणों, किसानों ने निकाली अनोखी देशी कांवड़ यात्रा, बुधनी में शिव-साधना कावड़ यात्रा का आयोजन

सीहोर। सावन मास के दौरान सीहोर जिलेभर में शिवभक्ति की धूम है। जगह-जगह आयोजन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सावन मास के चौथे सोमवार को भी कावड़ यात्राओं की धूम रही। इस दौरान जहां सीहोर में सीवन नदी तट से कुबेरेश्वर धाम तक भक्तों का तांता लगा रहा तो वहीं बुधनी विधानसभा में शिव-साधना कावड़ यात्रा का आयोजन हुआ। इसमें शिव-साधना पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान पूरी तरह से शिवभक्ति में रमे नजर आए। सीहोर के चंदेरी एवं हीरापुर में भी अनोखी कावड़ यात्रा देखने को मिली। यहां पर किसानों एवं ग्रामीणों ने देशी अंदाज में कावड़ यात्रा निकाली। शिवालयों में पूजा-अर्चना, अभिषेक का दौर चलता रहा।
कुबेरेश्वर धाम पहुंचे अमेरिका, ब्रिटेन सहित देशभर के लाखों भक्त-
सनातन संस्कृति और भगवान शिव की महिमा अब किस हद तक लोकप्रिय हो चुकी है, इसकी बानगी सोमवार को कुबेरेश्वर धाम में देखने को मिली। अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों से पहुंचे एक दर्जन से अधिक शिवभक्तों ने न सिर्फ धाम के दर्शन किए, बल्कि भारतीय परंपरा के अनुरूप पूरी श्रद्धा से पवित्र शिवलिंग पर एक लोटा जल अर्पित किया। विठलेश सेवा समिति के पंडित विनय मिश्रा और पंडित समीर शुक्ला ने विदेशी मेहमानों का पारंपरिक भारतीय आतिथ्य के साथ स्वागत किया। विदेशी नागरिकों ने इस बात पर आश्चर्य और प्रसन्नता जताई कि कैसे लाखों लोगों की यह भीड़ बिना किसी व्यवधान के सिर्फ शुद्ध भक्ति भाव से जुड़ी हुई है। उन्होंने विश्व शांति की कामना के साथ सनातन संस्कृति की मुक्तकंठ से सराहना की। अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने सुबह धाम पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं के बीच 25 क्विंटल नुक्ती का भोग वितरित कराया। पंडित मिश्रा ने कहा कि कांवड़ यात्रा और सेवा भाव भारतीय संस्कृति की असल ताकत है। सीवन नदी तट से लेकर कुबेरेश्वर धाम तक 100 से अधिक सेवा स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें चाय, नाश्ता, फलाहारी खिचड़ी और भोजन प्रसादी की निरंतर व्यवस्था है। यहां तक कि गुजरात से आए 35 श्रद्धालुओं के एक निजी दल ने सड़क किनारे खुद कड़ाही चढ़ाकर पूड़ी-सब्जी बनाई और राहगीरों की सेवा कर सेवा ही परमो धर्म का जीवंत उदाहरण पेश किया।
1200 जवानों का पहरा, निकलेगी भव्य कावड़ यात्रा-
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। सुरक्षा और ट्रैफिक कंट्रोल के लिए 1200 से ज्यादा पुलिस जवानों को तैनात किया गया है, जबकि चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए 10 वॉच टावर बनाए गए हैं। अखंड हिंद फौज और विठलेश सेवा समिति के स्वयंसेवक कंधे से कंधा मिलाकर व्यवस्था संभाल रहे हैं। जिलेभर के अधिकारियों को भी यहां पर तैनात किया गया है। विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सावन के इस अंतिम पड़ाव पर 25 अगस्त को सुबह 9 बजे सीवन नदी के तट से 11 किलोमीटर लंबी भव्य और ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा का आगाज होगा। दोपहर में जब यह यात्रा कुबेरेश्वर धाम पहुंचेगी तो सीवन नदी के पवित्र जल से बाबा का महाभिषेक होगा। इसके बाद 5 क्विंटल सुगंधित और रंग-बिरंगे फूलों से बाबा कुबेरेश्वर महादेव का अलौकिक श्रृंगार किया जाएगा, जिसे देखने के लिए भक्त आतुर हैं।
बुधनी में शिव-साधना कावड़ यात्रा का आयोजन, सामाजिक कुरीतियों मिटाने की पहल-
बुधनी विधानसभा क्षेत्र में सावन के चौथे सोमवार को शिव-साधना कावड़ यात्रा का आयोजन हुआ। इसमें शिव-साधना पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान पूरी तरह से शिवभक्ति में रमें नजर आए। शिव-साधना कावड़ यात्रा का नेतृत्व युवा नेता कार्तिकेय सिंह चौहान और विधायक रमाकांत भार्गव कर रहे हैं। सोमवार को कावड़ यात्रा बुधनी-शाहगंज मंडल के हथनौरा से शुरू हुई एवं शाहगंज होते हुए दिगंबर आश्रम पहुंची। 25 अगस्त को यात्रा भैरुंदा, सलकनपुर, गोपालपुर, लाडक़ुई और चकल्दी मंडल से गुजरते हुए नीलकंठ पर समाप्त होगी। इससे पहले कार्तिकेय सिंह चौहान ने मां नर्मदा का पूजा-पाठ एवं अभिषेक किया। इसके बाद वे कावड़ लेकर यात्रा में भी शामिल हुए। यात्रा के दौरान उन्होंने मंजीरे भी बजाए। पूरे समय बम-बम भोले एवं हर-हर महादेव के नारे गुंजायमान होते रहे। इस दौरान पूरा माहौल शिवमय नजर आए। शिव-साधना कावड़ यात्रा के दौरान सामाजिक कुरीतियां मिटाने, नशामुक्ति जैसी पहल भी नजर आई। इनके स्लोगन लगे पोस्टर लेकर भी श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए।
किसानों, ग्रामीणों ने निकाली देशी अंदाज में कावड़ यात्रा-
सावन के अंतिम सोमवार पर जहां एक ओर बड़े-बड़े आयोजनों की धूम रही, वहीं जिले के ग्राम हीरापुर और चंदेरी में आस्था, माटी की खुशबू और पुरातन परंपरा का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। आधुनिक चकाचौंध से दूर स्थानीय किसानों ने अपनी समृद्ध ग्रामीण संस्कृति को जीवंत रखते हुए एक अनोखी देशी कांवड़ यात्रा निकाली। पारंपरिक तरीके से बांस की लकड़ी, सुतली की रस्सी और मिट्टी के मटकों से सजाई गई इस कांवड़ में कुलासी नदी का पवित्र जल भरकर किसान पैदल शिव मंदिर पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का भावपूर्ण जलाभिषेक किया। इस देसी कांवड़ यात्रा की सबसे खास बात इसकी सादगी और परंपरा के प्रति किसानों का गहरा लगाव रहा। किसी भी तरह के आधुनिक साधनों या दिखावे का उपयोग न करते हुए किसानों ने अपने हाथों से मिट्टी के मटके और बांस की लकड़ी से पारंपरिक कांवड़ तैयार की। कुंलासी नदी के तट पर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन के बाद मटकों में जल भरा गया। रास्तेभर किसान भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए और अपनी माटी से जुड़ाव का संदेश देते हुए आगे बढ़े। किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने बताया कि अन्नदाता का भगवान शिव के साथ अटूट रिश्ता है। मंदिर पहुंचकर किसानों ने भगवान आशुतोष से क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा और गन्ना, मक्का, गेहूं, धान, सोयाबीन तथा मूंगफली की बंपर पैदावार की सामूहिक प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है और शक्कर व अन्य खाद्य सामग्रियों के दाम बढ़े हुए हैं। यदि भगवान शिव की कृपा से किसानों की फसलों की पैदावार अच्छी होगी और उत्पादन बढ़ेगा तो इससे बाजार में महंगाई को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। भरपूर फसल न केवल किसान परिवार को आर्थिक संकट से उबारेगी, बल्कि आम जनता को भी महंगाई से राहत दिलाएगी।

 

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