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ग्रामीण जेन-जी बोले, गलत सरपंच चुनने से बर्बाद होता है गांव…

तंज कसते हुए वायरल किया वीडियो, कीचड़ से सनी सडक़ को लेकर दिया धन्यवाद

सीहोर। जिला मुख्यालय से महज 15 किमी दूर ग्राम पंचायत धनखेड़ी इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रही है। गांव के जागरूक युवाओं ;जेन.जीद्ध ने पंचायत में हुए विकास की पोल खोलने के लिए अनोखा रास्ता अपनाया है। गांव की कीचड़ से सराबोर सडक़ों और बदहाली का वीडियो बनाकर युवाओं ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया हैए जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे दो वीडियो में से एक वीडियो में गांव की खस्ताहाल और कीचड़ से सनी सडक़ साफ नजर आ रही है। इस पर एक युवा तंज कसते हुए कहता दिख रहा है हमारे गांव के सरपंच जी ने गांव के विकास के लिए बहुत ही सराहनीय कदम उठाया है। गांव में इतनी अच्छी सडक़ बनवाने के लिए सरपंच जी का बहुत-बहुत धन्यवाद। यह सडक़ सिर्फ रास्ता नहीं] बल्कि हमारे गांव की पहचान है। ऐसे ही विकास के काम होते रहें और गांव दिन-ब-दिन आगे बढ़ता रहे। युवाओं का यह उल्टा धन्यवाद (कटाक्ष) सीधे तौर पर पंचायत प्रशासन तंज है।
वोट रिश्तों को नहीं, ईमानदारी को दें
वहीं दूसरे वीडियो में गांव के युवा ग्रामीणों को सही जनप्रतिनिधि चुनने की सीख दे रहे हैं। वीडियो में संदेश दिया गया है कि गांव तब बर्बाद नहीं होता जब सडक़ टूटती हैए गांव तब बर्बाद होता है जब गलत इंसान सरपंच बन जाता है। हर चुनाव में हम एक ही गलती दोहराते हैं, वोट काम और ईमानदारी देखकर नहीं, बल्कि पहचान, रिश्तेदारी और छोटे-छोटे लालच देखकर दे देते हैं। सरपंच वह होना चाहिए जो गलत के सामने डटकर खड़ा हो, गांव के पैसे को कमाई नहीं अमानत समझे और कुर्सी को ताकत नहीं जिम्मेदारी माने। एक गलत फैसला पूरे गांव का भविष्य 5 साल के लिए बदल देता है, इसलिए इस बार वोट रिश्तों को नहीं, काम और जिम्मेदारी को दें।
अफसरों की खामोशी से अपनाया यह रास्ता
बता दें ग्राम पंचायत धनखेड़ी के सरपंच राजेश वर्मा और सचिव भारत गौर पर पहले भी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लग चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्कूलों के आसपास कचरे और घूड़ों के ढेर लगे हैं, सार्वजनिक हैंडपंपों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। इसकी शिकायत जिला पंचायत सीईओ तक से की जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर स्थिति अब भी शून्य ही है। जब जिम्मेदारों ने कोई सुध नहीं ली तो तंग आकर गांव के युवाओं को सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा।

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