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रेहटी की इन प्रतिभाओं की ’हौंसलों की उड़ान’

रेहटी। प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती, वह अपनी पहचान खुद बनाती है… ये कहावत इन दिनों रेहटी नगर सहित तहसील की प्रतिभाओं पर चरितार्थ हो रही है। दरअसल इन दिनों रेहटी नगर सहित तहसील की कई ऐसी प्रतिभाएं हैं, जो अपने हुनर से अपनी पहचान बना रही हैं। पिछले दिनों जहां रेहटी नगर की नन्हीं बिटिया आध्या पालीवाल ने अपनी अद्भुत प्रतिभा से ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिस पर पूरा क्षेत्र गर्व कर रहा है। महज दो साल और ढाई महीने की आध्या पालीवाल ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति, बौद्धिक क्षमता और शारीरिक दक्षता के दम पर ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज कराया है। खास बात यह है कि आध्या ने महज 18 महीने की उम्र में पूरा हिंदू मंत्र सुनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। आध्या के पिता विजय पालीवाल ने कहा कि उनकी दो साल ढाई महीने की बेटी ने इतनी कम उम्र में कई ऐसी चीजें याद कर ली हैं, जिन्हें सीखने में बच्चों को वर्षों लग जाते हैं। आध्या हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला, सप्ताह के दिनों और महीनों के नाम, बॉडी पार्ट्स, विलोम शब्द और 100 तक की गिनती आसानी से बता देती है। इसके साथ ही वह 10 हिंदू मंत्र भी सुना सकती हैं। आध्या की प्रतिभा केवल पढ़ने और याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आध्या ने 16 योगासन करके अपनी शारीरिक दक्षता और संतुलन का भी प्रदर्शन किया है। आध्या 20 पक्षियों, 22 सब्जियों और 80 जानवरों की पहचान करने के साथ ही 16 प्रकार के यातायात के साधनों, फलों और विभिन्न आकारों को भी पहचान लेती हैं।
रक्षा ने एमपीपीएससी में पाई सफलता, बनी सहायक प्राध्यापक-
इधर रेहटी नगर की रक्षा मेहरा ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल करते हुए सहायक प्राध्यापक पद पर चयन पाया है। रक्षा ने गणित विषय से 31वीं मेरिट हासिल कर अनारक्षित श्रेणी में सहायक प्राध्यापक पद पर चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। रक्षा के परिजनों ने बताया कि रक्षा ने अपनी स्कूली शिक्षा शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रेहटी से पूरी की। इस दौरान ही उन्होंने पीएससी की तैयारी भी शुरू कर दी थी। नियमित अध्ययन, अनुशासन और लगातार मेहनत के बल पर उन्होंने महज 24 वर्ष की उम्र में एमपीपीएससी की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की। रक्षा ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और विशेष रूप से अपने पिता रामकिशोर मेहरा को दिया। उन्होंने कहा कि मेहनत के साथ परिवार का सहयोग और पिता का विश्वास उनकी सफलता में महत्वपूर्ण रहा। पिता ने हमेशा उन पर भरोसा किया और उनके लक्ष्य को अपना लक्ष्य समझकर हर कदम पर प्रोत्साहित किया।

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Après une journée chargée, on improvise souvent un dîner rapide, puis l'on découvre qu'un plat simple peut avoir le goût d'un bon restaurant. Les recettes de chefs méritent d'être étudiées plus en détail. Entre égouttage et finition en poêle Quand le café refroidit dans la tasse, on pense déjà au dessert : une recette simple peut sauver la fin du repas.