Newsआष्टाइछावरजावरधर्मनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशरेहटीसीहोर

पूर्वजों के प्रति समर्पण और कृतज्ञता का पर्व है श्राद्ध: पं. पंडित ओमप्रकाश पाठक

सीहोर। प्रत्येक मनुष्य अपने धर्म और पूर्वजों की परंपराओं के अनुसार जीवन जीता है और यही उसकी मूल पहचान होती है। हिंदू सनातन धर्म में पितरों के प्रति समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे उत्तम माध्यम श्राद्ध कर्म है, जिसे हर व्यक्ति को पूर्ण मनोयोग और श्रद्धा के साथ करना चाहिए।
यह विचार आचार्य पंडित ओमप्रकाश पाठक ने सीवन नदी तट स्थित बढिय़ाखेड़ी के बजरंग अखाड़ा परिसर में आयोजित पितृ तर्पण कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
तीन पीढिय़ों तक किया जाता है तर्पण
पितृ तर्पण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित पाठक ने बताया कि श्राद्ध पक्ष के दौरान माता और पिता की तीन पीढिय़ों तक उनके गोत्र और नाम का उच्चारण कर तर्पण किया जाता है। इसके अलावा अपने गुरु, मित्रों, देवताओं, ऋषियों तथा इस जन्म व पूर्व जन्म के सभी पितरों के प्रति कर्तव्य निभाते हुए जलांजलि दी जाती है। इस दौरान गो-सेवा, ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों की सेवा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
10 अक्टूबर को होगी पितृमोक्ष अमावस्या
पंडित पाठक ने बताया कि इस वर्ष पितृपक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन कृष्ण पक्ष की पितृमोक्ष अमावस्या 10 अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान प्रतिदिन जौ, तिल और तीर्थ जल मिलाकर पूर्व, उत्तर और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के निमित्त तर्पण किया जाता है।
पितृ दोष से मुक्ति के लिए बताए उपाय
प्रकृति संरक्षण और पितरों की शांति के लिए पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें तथा संध्या के समय दीपक जलाएं। पितरों के निमित्त ब्राह्मणों के माध्यम से गीता पाठ, पितृ भागवत या पितृ सूक्त का पाठ अवश्य करवाना चाहिए। जिन लोगों की कुंडली या जीवन में पितृ दोष की समस्या है, उनके लिए श्रीमद्भागवत गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना विशेष रूप से फलदायी और लाभप्रद रहता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button