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66 की उम्र में भी जुनून बरकरार, सीहोर के मोहन पाराशर मलेशिया में होने वाले वेटलिफ्टिंग वल्र्ड कप में करेंगे देश का प्रतिनिधित्व

4 से 6 दिसंबर तक मलेशिया में होगी वल्र्ड कप चैंपियनशिप

सीहोर। उम्र को अक्सर लोग सीमाओं से जोडक़र देखते हैं, लेकिन सीहोर जिले के ग्राम बिलकिसगंज निवासी 66 वर्षीय वेटलिफ्टर मोहन पाराशर ने अपने अनुशासन, जुनून और कड़ी मेहनत से साबित कर दिखाया है कि मजबूत इरादों के आगे उम्र की कोई सीमा नहीं होती। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहरा चुके मोहन पाराशर एक बार फिर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। वे आगामी 4 से 6 दिसंबर तक मलेशिया में आयोजित होने वाली वेटलिफ्टिंग वल्र्ड कप चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। वल्र्ड कप के लिए उनका चयन 65 से 69 वर्ष की आयु वर्ग तथा 85 किलोग्राम बॉडी वेट कैटेगरी में हुआ है। इस प्रतियोगिता के लिए भारत की ओर से छह वेटलिफ्टरों और एक मैनेजर का चयन किया गया है।
बता दें मोहन पाराशर का खेल सफर शानदार उपलब्धियों से भरा रहा है। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 बार और राष्ट्रीय स्तर पर 5 बार स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं। वल्र्ड चैंपियनशिप में 3 स्वर्ण, कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग में 2 स्वर्ण और एशियन चैंपियनशिप में 1 स्वर्ण पदक। ग्रीस में आयोजित इंटरनेशनल वल्र्ड चैंपियनशिप में उन्होंने 148 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता था, जो उनके करियर का एक प्रमुख मील का पत्थर है।
13 साल की उम्र में शुरू किया था सफर
मोहन पाराशर का वेटलिफ्टिंग से जुड़ाव करीब पांच दशक पुराना है। उन्होंने महज 13 वर्ष की उम्र में सीमित संसाधनों के बावजूद प्रैक्टिस शुरू की थी। वर्ष 1978 से 1982 तक वे लगातार 5 बार मध्यप्रदेश के स्टेट चैंपियन रहे। जिला स्तर से शुरू हुआ उनका सफर आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है। मोहन पाराशर का कहना है कि जब तक शरीर साथ देगाए वे देश के लिए मेडल जीतने का प्रयास जारी रखेंगे।
60 से अधिक युवाओं को दे रहे ट्रेनिंग
मोहन पाराशर खुद खेलने के साथ-साथ नई पीढ़ी के खिलाडिय़ों को तराशने का काम भी कर रहे हैं। उनके कोचिंग सेंटर में 60 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनकी कोचिंग में तैयार हुए आधा दर्जन से अधिक वेटलिफ्टरों ने नेशनल लेवल और खेलो इंडिया जैसी प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। वे युवाओं को सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि अनुशासन और मानसिक मजबूती का पाठ भी पढ़ाते हैं।

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