रात की बिजली कटौती के विरोध में किसानों का हल्लाबोल, निकाला मशाल जुलूस, सडक़ पर धरना देकर किया चक्काजाम
बरखेड़ी-कुलास सबस्टेशन पर प्रदर्शन, दोषी बिजली अधिकारियों पर एफआईआर और पीडि़त परिवारों को मुआवजे की मांग

सीहोर। रात के समय हो रही अघोषित बिजली कटौती और खेतों के ऊपर से झूलते 11 केवी के खतरनाक बिजली तारों से परेशान दर्जनों गांवों के किसानों का गुस्सा फूट फूट पड़ा। किसानों ने बरखेड़ी-कुलास विद्युत सबस्टेशन क्षेत्र में रात के समय हाथों में जलती मशालें लेकर जुलूस निकाला और मुख्य सडक़ पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। उग्र किसानों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अघोषित कटौती तुरंत बंद करने, झूलते तारों को दुरुस्त करने तथा लापरवाह बिजली अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई।
आंदोलन कर रहे किसानों का आरोप है कि रात 8 बजे से लेकर सुबह तक हर 2 घंटे में बिजली काट दी जाती है, जिससे रात में खेतों में सिंचाई करना और घर पर सोना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा खेतों के ऊपर से झूल रहे 11 केवी के हाईटेंशन तारों की चपेट में आने से कई किसान करंट की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं और कई बेजुबान गाय-भैंसों सहित मवेशियों की अकाल मौत हो चुकी है। किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे हादसों के बावजूद बिजली विभाग का अमला सो रहा है।
25 से ज्यादा गांवों के 500 किसान मैदान में
किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा और जनपद सदस्य कमलेश पप्पू पटेल के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन में चंदेरी, बड़बेली, महोरिया, कुलास कला, हीरापुर, बरखेड़ी, आलमपुरा, ढाबला, बिलकिसगंज और पिपलिया मीरा सहित 25 से अधिक गांवों के 500 से ज्यादा किसान शामिल हैं। किसानों का कहना है कि वे पिछले 3 महीनों से भोपाल और सीहोर में जल सत्याग्रह, मशाल जुलूस और धरने के जरिए अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें सडक़ पर उतरकर चक्काजाम करने को मजबूर होना पड़ा।
लापरवाह अफसरों पर एफआईआर की मांग
किसानों ने सीहोर बिजली मंडल के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री और श्यामपुर के सहायक यंत्री सहित संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है। किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि बिजली हादसे में पीड़त परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और झूलते तारों को तुरंत बदला जाए।
न्याय न मिला तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर करेंगे प्रदर्शन
किसानों ने शासन-प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान देकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे पीडि़त किसानों को हाथ-ठेले पर बैठाकर दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय का दरवाजा खटखटाएंगे। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी समस्याओं का पक्का समाधान नहीं होता, आंदोलन लगातार जारी रहेगा।



