Newsआष्टाइछावरजावरनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशराजनीतिकरेहटीसीहोर

शिवराज का धरना और अफसरों की मान मनोव्वल रही बेअसर, खुले आसमान के नीचे कटी आदिवासियों की रात, धरना जारी

सीहोर। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसमी में आदिवासियों के आशियाने उजडऩे के बाद का घटनाक्रम अब पूरी तरह एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक ड्रामे में बदल चुका है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कड़े विरोध और रातभर चले धरने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और वन विकास निगम के तेवर ठंडे नहीं पड़े। हालात यह रहे कि आधी रात को अफसरों ने आदिवासियों को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन जब वे अपनी जिद पर अड़े रहे तो रात के तीन बजे अधिकारियों को बैरंग लौटना पड़ा। वहीं बेघर हुए आदिवासी परिवार अपनी उम्मीदें लेकर पूरी रात खुले आसमान के नीचे बैठे रहे। इधर बताया जा रहा है कि आज पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी ग्राम कोसमी पहुंच रहे हैं।
बता दें घटना की शुरुआत रविवार दोपहर करीब 2 बजे हुई थी, जब वन विकास निगम का अमला भारी पुलिस बल के साथ कोसमी गांव पहुंचा। देखते ही देखते जेसीबी मशीनों ने बरेला समुदाय के 12 कच्चे-पक्के मकानों को जमींदोज कर दिया। सिर्फ घर ही नहीं गिराए गए, बल्कि खेतों में लहलहाती फसल को भी रौंद दिया गया और पीने के पानी के कुओं को तक मिट्टी भरकर पूर दिया गया। अपने आशियाने और आजीविका को इस तरह मलबे में बदलते देख आदिवासी महिलाएं छाती पीट-पीटकर रोने लगीं। सिर पर छत न होने के कारण बेबस परिवारों ने बच्चों को सुलाने के लिए पास के पेड़ों पर कपड़े के झूले बांधे।
शाम 5 बजे पहुंचे शिवराज, शुरू हुआ धरना
जैसे ही इस पूरे मामले की खबर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंची, वे शाम 5 बजे सीधे कोसमी गांव पहुंच गए। आदिवासियों का ऐसा दर्द देखकर वे बेहद भावुक हो गए। रोती-बिलखती महिलाओं को गले लगाकर ढांढस बंधाते हुए शिवराज खुद जमीन पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मौके से ही मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन लगाकर कड़ी नाराजगी जताई और तल्ख लहजे में कहा मेरे क्षेत्र में जुल्म की इंतिहा हुई है, जिन घरों में सुबह बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब चीखें सुनाई दे रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत प्रभावितों के खाने-रहने का इंतजाम करने और नए मकान बनाकर देने के सख्त निर्देश दिए।

रात 1 बजे अफसरों की मान-मनोव्वल, पर नहीं माने आदिवासी
मामला जब तूल पकडऩे लगा और केंद्रीय मंत्री धरने पर बैठ गए तो प्रशासन में हडक़ंप मच गया। केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान देर रात राजधानी भोपाल के लिए रवाना हुए। इधर रात करीब 1 बजे प्रशासनिक और वन विभाग के अधिकारी आदिवासियों को मनाने और मामले को शांत करने के लिए मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने काफी मान-मनोव्वल की, लेकिन पीडि़त आदिवासी और खुद शिवराज का गुस्सा शांत नहीं हुआ। आखिरकार रात करीब 3 बजे अधिकारी बिना किसी ठोस नतीजे के बैरंग वापस लौट गए।
पूरी रात आंखों में कटी, सियासत भी गरमाई –
अधिकारियों के जाने के बाद भी आदिवासियों का धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहा। घर की एक-एक ईंट बिखर जाने के बाद इन गरीब परिवारों की पूरी रात आंखों ही आंखों में खुले आसमान के नीचे कटी। दूसरी ओर इस घटना पर प्रदेश की राजनीति भी गरमाई हुई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा की आपसी खींचतान का खामियाजा इन गरीब आदिवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
आरक्षित वन भूमि पर था अतिक्रमण –
वन परिक्षेत्र अधिकारी जया यादव ने बताया कि वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। मामले में वन विकास निगम सीहोर के डीएफओ तरुण कुमार का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई वैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि लाडक़ुई परिक्षेत्र की कोसमी बीट के कक्ष क्रमांक 426 में 183 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र है, जहां वर्ष 2021 में पौधरोपण किया गया था। इस भूमि के लगभग 32 हेक्टेयर हिस्से पर वर्ष 2022 में अतिक्रमण किया गया था, जिसे हटाने की कार्रवाई की गई है।
चर्चा यह भी-
इस पूरी कार्रवाई के बीच क्षेत्रों यह चर्चा जोरों पर है। चर्चा के मुताबिक इसमें एक बीजेपी के नेता का बहुत बड़ा हाथ है। हर जगह जंगल में आदिवासी लोगों ने कब्जा कर रखा है और वन भूमि पर अधिकारियों को डरा कर उन्हें वन भूमि के लिए पांच-पांच एकड़ पर अधिकारिक रूप से पट्टे वितरण कर दिए गए हैं, लेकिन किसानों के पास उससे भी कहीं अधिक जमीन पर जंगल में कब्जा है। आदिवासी लोग पेड़ों में कट लगाकर उन्हें सुखा देते हैं फिर उन्हें काटकर उनके ढूंढ निकाल कर जेसीबी या मजदूर से उसे खेती के लिए भूमि बना देते हैं। वन विभाग अगर कोई कार्रवाई करें तो उसे भाजपा के नेता एवं आदिवासी लोग की एकता देखकर वोट की राजनीति के द्वारा अपना कदम पीछे करना पड़ता है। वन विकास निगम वालों को या वन विभाग वालों को अपनी इस भूमि पर कब्जे को रोकने से पहले इन बीजेपी के नेताओं से बचना पड़ता है, नहीं तो उनकी नौकरी भी खतरे में आ जाती है। अब जो धरना प्रदर्शन हो रहा है उसमें केंद्रीय मंत्री और विधायक सांसद और क्षेत्र के सभी भाजपा नेता धरना प्रदर्शन पर मौजूद थे, जबकि आदिवासी द्वारा पूरे जंगल पर वन भूमि पर कब्जा कर लिया गया है। सेटेलाइट से नक्शा देखा जाए तो आदिवासी किसान के पास 5 एकड़ भूमि की जगह 50-50, 100 एकड़ जमीन पर कब्जा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button