कपड़े दिलाने का झांसा देकर छात्रा से दुष्कर्म के दोषी को अदालत ने सुनाई 20 साल की सजा

सीहोर। जिले के भैरूंदा में एक नाबालिग छात्रा के साथ अपहरण और दुष्कर्म का मामला सामने आया है। भैरूंदा के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस मामले में आरोपी को दोषी मानते हुए 20 साल की कठोर कैद और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक मनोज जाट ने की।
पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार पीडि़ता के पिता ने बताया कि वह ड्राइविंग का काम करते हैं। घटना 25 अक्टूबर 2025 की सुबह करीब 8 बजे की है। रोज की तरह पिता अपनी गाड़ी लेकर बस स्टैंड चले गए थे और मां भी काम पर निकल गई थी। घर पर उनकी बीच वाली बेटी स्कूल जाने के लिए निकली थी।
दोपहर के वक्त जब मां ने फोन कर के हालचाल जानना चाहा तो पता चला कि बेटी स्कूल पहुंची ही नहीं है और घर से गायब है। यह सुनकर माता-पिता ने तुरंत उसकी तलाश शुरू कर दी। खोजबीन करते हुए जब वे सब्जी मंडी पहुंचे तो उन्होंने देखा कि विशाल इवने नाम का युवक उनकी बेटी को अपनी बाइक पर बैठाकर कहीं ले जा रहा है। अगले दिन यानी 26 अक्टूबर 2025 को पुलिस से सूचना मिली कि उनकी बेटी मिल गई है।
छात्रा ने बताई पूरी बात
घर लौटने पर जब परिजनों ने पूछताछ की तो छात्रा ने अपनी आपबीती सुनाई। पीडि़ता ने बताया कि वह आरोपी विशाल को करीब एक महीने से जानती थी। घटना वाले दिन जब वह सुबह 10.30 बजे स्कूल के लिए निकल रही थी तो रास्ते में आरोपी विशाल मिल गया। आरोपी ने उससे कहा कि चलो घूमकर आते हैं और उसे बहला-फुसलाकर अपनी बाइक पर बैठाकर बाजार ले गया।
बुआ के कमरे पर ले गया था
इसके बाद आरोपी उसे एक कपड़े की दुकान पर ले गया और एक जोड़ी कपड़े दिलाए। कपड़े दिलाने के बाद आरोपी ने कहा कि इन्हें अपने कमरे पर रख देते हैं और दोपहर करीब 1.30 बजे वह छात्रा को अपने बुआ के लडक़े के कमरे पर ले गया, जहां उस समय कोई नहीं था। सूने कमरे का फायदा उठाकर आरोपी ने छात्रा की मर्जी के खिलाफ उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। छात्रा के मना करने के बावजूद आरोपी ने उसकी बात नहीं मानी।
अदालत ने सुनाई सजा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत केस दर्ज किया, जांच पूरी की और सबूतों के साथ कोर्ट में चार्जशीट पेश की। अदालत में अभियोजन पक्ष द्वारा रखे गए ठोस तर्कों और सबूतों को सही मानते हुए न्यायालय ने आरोपी विशाल इवने निवासी भैरूंदा को दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत 20 साल का सश्रम कारावास, बीएनएसएस की धारा 87 के तहत 5 साल का सश्रम कारावास और कुल 10 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।



